नवीनतम लेख/रचना





  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गर्मी-ए-इश्क भी क्या ख़ाक असर लाएगी, बर्फ  पिघलेगी  तो  चट्टान  नज़र  आएगी। हम तो दिल देके सजाते थे कोई ख्वाबे-विसाल, किसको मालूम था  रुसवाई  कहर ढाएगी। शौक  पीने  का  अगर है  तो निगाहों  से पी, मय...

  • आदत

    आदत

    धीरे धीरे उनके लिए हमारी चाहत भी इबादत हो गयी है क्या करें अब जीना मुश्किल है उनके बिना क्योंकि उनके साथ हर पल जीने की आदत हो गयी है बुरा लगा था मुझे जब देखे...



  • तन और मन

    तन और मन

    भगवान ने तन दिया , भगवान ने मन दिया तन अच्छा तो मन अच्छा मन अच्छा तो तन अच्छा , दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं, मन को अच्छा रखो’ अच्छे विचारों से, मन को...

  • जब तुम मिली

    जब तुम मिली

    जब तुम मिली मुझे ऐसा लगा। जमाने की सारी खुशी मिल गई। जब तुम मिली,तब मैं ऐसा समझा। जिन्दगी में खुशियों की बहार आ गई। जब तुम मिली मुझे महसूस हुआ। तरसते लबों को हँसीं मिल...

राजनीति

कविता