नवीनतम लेख/रचना




  • इक एहसास……….!!!!!!!

    इक एहसास……….!!!!!!!

    तुम तसव्वुर में हो तस्सव्वुर की तरह, देख के तुम्हें निहाल है तसव्वुर की तरह….! तेरा वो ख़त लिखना, लिफाफे में बंद करना, याद आता है तस्सव्वुर में वो कोरों का भीगना..!! बिन पढ़े ही तेरा...

  • भविष्य

    भविष्य

    किसी शाख से ,टूटे पत्ते की तरह – भटकते हैं हम.. दिशाविहीन.. अन्तहीन… लक्ष्य तो है मगर, लक्ष्यहीन… अपनी पहचान पाने की कोशिश में- अहिंसक आन्दोलनोँ की राहोँ में, व्यवस्था की क्रूर लाठी से – या...

  • कतार

    कतार

    हर जगह कतार  है, फ़ोन भी बोलता है आप कतार में है, कब खतम होगी, ये कतार पता  नहीं लोग बढ़ते जा रहे है हर तरफ मारामारी है सबको जल्दी है, कतार से बहार आने की...


  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 50)

    45. हसन और मुबारक मुबारक, अलाउद्दीन का चौथा पुत्र था। अपने से बडे़ तीनों भाइयों की दुर्दशा देखकर उसे बड़ा खौफ हुआ। अपने प्राणों या अंग-भंग किए जाने की उसे बड़ी चिंता थी। इस अव्यवस्था में उसे अपने...

  • अबला

    अबला

    हाय रे अबला तेरी यही कहानी, कबतक ऐसी बनी रहेगी तेरी लाचारी, कुछ तो करना ही होगा चाहे वो हो मनमानी, चुप बैठने से नहीं होगा दूर ये कहानी। आखिर सबकी आँखों में क्यों बसीं है...


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