कविता

आरक्षण और नेता…

‘आरक्षण और नेता’ बू गया था इस अराजकता का वीज, उसी दिन जब धर्म के नाम पर, आरक्षण का जहर उगाया गया था। और समान अधिकार वाले संविधान को, खून के आंसू रुलाया गया था॥ मानता हूं, मंशा कमजोरों के कल्याण की थी पिछडों के उत्थान की थी, दबे कुचलों के सम्मान की थी भूखों […]

हास्य व्यंग्य

आखिर कुर्सी को मुंह खोलना ही पड़ा

आखिर कुर्सी को मुंह ही खोलना पड़ा (मुफ्त हुए बदनाम, हाय तुझे अपनी गोद में बिठाकर) अचानक कुर्सी ने मुझे पुकारा और बोली हां जो भी पूछना हो, पांच मिनट में पूछ डालो I मैं भौचक रह गया, समझ में नहीं आया कि क्या करूं, क्या पूछूं, क्या नहीं पूछूं I हालांकि कई सालों से […]

गीतिका/ग़ज़ल

जब तलक है दम कलम चलती रहेगी/गज़ल/

जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी दर्द दुखियों का गज़ल कहती रहेगी   साज़िशें लाखों रचे चाहे समंदर सिर उठा सरिता मगर बहती रहेगी   जानती अब नरपिशाचों से निपटना बेधड़क बेटी सफर करती रहेगी   बन्दिशों की बाढ़ हो या सिर कलम हों प्रेम की पुरवा सदा बहती रहेगी   टिक नहीं पाएगी […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

कितना है दर्दनाक ये एहसास देखिए सच्चाई जिसको समझे, है आभास देखिए सबकी दलील सुन के पशेमां है वो बडा सीधेपन का कैसा ये उपहास देखिए इक एक कर के राह में ही रुक गए सभी विश्वास ही रहा न रही आस देखिए बच्चे को चाँद में भी है रोटी दिखाई दी माँ का निराशापन […]

गीत/नवगीत

तेरे हाथों मे है सांवरे….

तेरे हाथों मे है सांवरे, मेरे जीवन की नैया। तार दो तार दो सांवरे पार, बनके खिवैया॥ हर तरफ गरदिशों के है घेरे, घिर गया हूं घनी मुश्किलों में। हो भंवर बीच सागर में जैसे, आग जैसे लगी साहिलों में॥ संकटों से उबारो हमें, चैन बंसी बजैया…. तार दो तार दो सांवरे पार, बनके खिवैया.. […]

गीत/नवगीत

इस प्यार की धरा का

इस प्यार की धरा का, सावन सरस बनों तुम। हर बूंद से निकलता, बस प्रेम रस बनों तुम।। पलकें बिछाऊं अपनी, तेरी डगर में हमदम। हरियाली कर दो तन मन, मुझे प्रेयसी वरो तुम…. हर बूंद से निकलता, बस प्रेम रस बनों तुम…. प्यासा है मन का आंगन, प्यासा है प्रेम उपवन। बन कर बरसता बादल, […]

कविता

जिन्दगी खामोश है, ठहर सी गई है …………………………………. 

जिन्दगी खामोश है ठहर सी गई है, रंगमंच खाली पड़ा है, वक्त यूंही निकल रहा है, मेरी कलम नहीं ठहरी है, उसे बढ़ना है, मुझे सम्भालना है, वक्त यूंही निकल रहा है, जिन्दगी में कई पात्र देखे, उनमें ढलने की भी बहुत कोशिश की मैंनें, वक्त यूंही निकल रहा है, जो चाहा उसे पाने की […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आप को रूह से चाहता कौन है पूछते तब भी हो बावफा कौन है इल्म की राह है मुश्किलों का सफर बंदगी में खुदाया, मिटा कौन है । देख के गैर की महफ़िलो में तुझे लोग हैं पूछते, बेवफा कौन है । मतलबी लोग है इस जहाँ के मगर डूबती नाव पर, बैठता कौन है […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

अंदर बाहर आग लगी है घर चौबारे सुलग रहे ये हालात सुधारें कैसे कैसे कोई विलग रहे टुकड़ा-टुकड़ा टूटा भारत टूटी उसकी ताक़त भी जांत-धर्म के झगड़े में क्योंभाई-भाई अलग रहे पहले मुझको फूलों जैसा तेरा सँग जो प्यारा था धीरे-धीरे जाना मैंने तेरा रूख तो न्यारा था मीठी-मीठी बातें तेरी सबको ही फुसलाती थी […]

कविता

चकाचौंध का इंद्रजाल

चकाचौंध का इंद्रजाल लोभी जीभ के खातिर अँधेरी राहों को चुन कर शादी के बंधन का मजाक उड़ा कई पतियों की मोहरों को बिसात पर बिछा काली गोटियों के खाने के काले किरदार निभा सफेद खानों का नकाब ओढ़ शौहरत की सीढ़ियों पर चढ़ चकाचौंध का इंद्रजाल बुन अपनी ही प्रतिरूप बेटी को मार हत्यारिन […]