नवीनतम लेख/रचना





  • क्षणिका

    क्षणिका

    ईश्वर ने जड़ों में दुख कुछ वैसे ही डाला जैसे बड़ी श्रद्धा से सीधा आंचल कर तुलसी में जल देती हू ..!! …रितु शर्मा



  • क़त’आ

    क़त’आ

    भीगी  पलकें  सुखा  लिया हमने, दिल को पत्थर बना लिया हमने। सर्द आहों से सिल लिये लब को, रूप सादा  बना लिया  हमने। दाद कुछ दो कि किस क़रीने से, तेरी फितरत छुपा लिया हमने।

  • कविता

    कविता

    राँझना तुम्हे पता हैं अकेले बर्फ ही नही जमती वक्त भी जम जाता हैं हो जाता हैं सख्त चट्टानों की तरह जिस दिन तुम नजर नही आते अंधी हो जाती हूँ सबकुछ रुक जाता हैं मेरे...