नवीनतम लेख/रचना

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये मौसम है खुशगवार सखी प्रीतम से मुझको प्यार सखी ।   मेरी  प्रीत  की  अदा निराली उसका मुझको इंतजार सखी ।   दिन रात उसका नाम पुकारू जीवन भर का व्यवहार सखी ।   मेरी...




  • यशोदानंदन-३९

    अपनी अद्भुत लीला समाप्त कर श्रीकृष्ण ने व्रज लौटने का निश्चय किया। व्रज में श्रीकृष्ण की अनुपस्थिति से प्रोत्साहित अरिष्टासुर ने व्रज को तहस-नहस करने के उद्देश्य से व्रज में प्रवेश किया। उसने वृषभ का रूप...

  • ग़ज़ल : मौका

    ग़ज़ल : मौका

      गजब दुनिया बनाई है, गजब हैं लोग दुनिया के मुलायम मलमली बिस्तर में अक्सर वे नहीं सोते यहाँ हर रोज सपने क्यों, दम अपना तोड़ देते हैं नहीं है पास में बिस्तर, वे नींदें चैन...

  • सूर्य और दीपक

    सूर्य और दीपक

    संध्या का समय , दूर क्षितिज में सूर्य अस्त हो रहा था, धरती पर धीरे धीरे अंधकार पसर रहा था, सूर्य का मन ग्लानी से भर उठा –यह क्या ? जिस धरा को दिन भर मैंने...


  • एक दीपक

    एक दीपक

    कभी नहीं डरता है चाहे जितना हो तिमिर एक दीप अंधेरों का देता है सीना चीर प्रेम का है तेल इसमें स्नेह की है बाती खुशियों का प्रकाश ये देता है दिन-राती स्वयं सितम सहकर हरता...


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