पद्य साहित्य मुक्तक/दोहा

दोहे !

    विवेक को बनाओ जज, मन होगा रस्ते पर सचाई के सांगत में, विवेक पहरेदार | ******************************** साम-दाम-दण्ड व भेद, स्वार्थ-नीति हैं सब स्वार्थी नेता सोचते, उनके दास हैं सब | ******************************** नहीं धार्मिक यहाँ नर, हो गया साम्प्रदायिक नफ़रत, हिंसा में विश्वास,विसरे आध्यात्मिक | ********************************* कर्म से बढ़कर न धर्म, न आगे कोई […]

आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 45)

बांगिया जी का स्थानांतरण हरिद्वार शिविर में जाने से कुछ दिन पहले हमारे बैंक में बड़े पैमाने पर उच्च अधिकारियों के स्थानांतरण हो रहे थे। लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन एक सूची आ जाती थी, जिनमें स्केल 4 और 5 के उन अधिकारियों के नाम होते थे, जिनका स्थानांतरण किया जाता था। जब भी ऐसी सूची […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये दस्तंदाजियां ये करावतें हर लम्स पे ज़हन का पहरा है सुरखुरु फिर भी मोहब्बत और जख्म गहरा है ये कैसी गुरवतें ये चाहते है क़ज़ा या राज़ कोई गहरा है वक़्त बदला नहीं न शीशा ए दिल और सख्त पहरा है ये फानूस से आदमी ये ख़्वाओं की ज़मी नहीं एक चेहरा है है […]

गीतिका/ग़ज़ल

रक्षाबंधन

दोहा: आया है त्योहार यह ख़ुशियाँ लिये अपार राखी बांधे बहन जब ‘भान’ करें सत्कार ० नज़्म ० पावन रक्षाबंधन आया देखो प्रेम-सगाई को भाई और बहन के अद्भुत रिश्तों की गहराई को स्नेह-सिक्त धागे में गूँथे दिल की सभी दुआओं को तिलक लगाकर बाँधे बहना राखी अपने भाई को नज़र तुम्हें ना लगे किसी […]

सामाजिक

भाई का प्यार है राखी

बहुत ही सुन्दर और प्यारा त्यौहार है ये रक्षाबंधन का, एक भाई-बहन के बिच का छिपा हुआ प्यार है रक्षाबंधन का, इस दिन सभी भाईयो पर दुआओं की बौछार होती है, बदले में बहन उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती है, सभी धर्म में मनाने वाला त्यौहार है ये रक्षाबंधन का, सच में बहुत खुशियो […]

सामाजिक

अनमोल है राखी

नाजुक रेशे से बनी हुई है लेकिन कभी ना टूटने वाली एक पक्की डोर है राखी, बहनो का प्यार और भाईयो का विश्वास है राखी, यह कोई मतलब से बनाया हुआ रिश्ता नहीं बल्कि, बहनो के अपने भाइयो पर होने वाले हक की हकदार है राखी, गाँव में अपने घरो में मायूस बैठी बहनो को, […]

हाइकु/सेदोका

सेदोको

  १ निष्ठा राखी मैं रोली – अक्षत संग भेजती भैया प्यारे निभाना रिश्ता कृष्ण बन बचाना जग स्त्रियों की लाज। २ बांधें राखियां अब स्त्री को हर स्त्री बचाना स्वयं चीर दुःशासनों से उठा भुजा अपनी काली – रणचंडी – सी। ३ भेजूं राखियां सीमा प्रहरियों को जिनकी कुर्बानी से देश ले साँसें स्त्रियां […]

हाइकु/सेदोका

हाइकु

१ दुआ की राखी करे दीर्घायु भाई करूँ कामना। २ राखी की रस्म प्रेम की पक्की डोर सजी कलाई। ३ श्रावणी पूनो पे बंधे नेह तार खिला है प्यार। ४ वैश्विक राखी हुई ऑन लाइन सलूनों पर। ५ प्रेम धागे से जुड़े मन के तार रक्षा पर्व पे। ताँका १ दिल घाटी पे गूंजती याद […]

कविता सामाजिक

भाई बहन के पावन त्यौहार..

इस बार रक्षा-बंधन के पावन औसर पे, एक बहन अपने भाई से बोली बड़े प्यार से, अब मेरी हर दुःख सुख में काम आना तुम्हारा फ़र्ज़ है क्योंकि तुम पर इस नाजुक सी डोरी का क़र्ज़ है भाई भी मुस्कुरा कर अपने बहन के सिर पर हाथ रख कर बोला, तुम्हारी इज़्ज़त की रक्षा कारूँगा, […]

कविता सामाजिक

सरहद पर जो सैनिक तैनात है…

आज हम सभी अपने घरों में खुश और आजाद है, खूब खा रहे है मिठाईया, जब हमारे अपने पास है, बहने है रक्षा बंधन का त्यौहार मनाने के लिए हमारे पास, पर कसी को कोई फिकर ही नहीं की हमारी खुशियो को लिए, दूर सरहद पर कोई आज के दिन भी तैनात है.. किसी को […]