नवीनतम लेख/रचना



  • स्मृति के पंख – 9

    हमारे साथ के मकान वाले भी कपूर थे। लाला हरीचन्द और गोकुलचन्द। लेकिन हमारे विचारों में बड़ा अन्तर था। वो अंग्रेज नवाज थे और हम आजादी के दिलदाजा। फिर भी दुनियादारी में मैं और गोकुलचन्द दोस्त...

  • चलनी खोज

    चलनी खोज

    करवाचौथ के दिन पत्नी सज धज के पति का इंतजार कर रही  शाम को घर आएंगे तो  छत पर जाकर चलनी में चाँद /पति पति का चेहरा देखूँगी । पत्नी ने गेहूँ की कोठी मे से...

  • मुझे मिल गयी..

    मुझे मिल गयी..

      मुझे मिल गयी तेरी रफ़ाक़त अच्छा है मुझे मिल गयी तेरी मुहब्बत अच्छा है मुझे भी सभी लोग बुतपरस्त समझ लेते करने लगा हूँ अब मैं तेरी इबादत अच्छा है पूछ कर कोई किसी से...

  • चाँद -चकोर 

    चाँद -चकोर 

      आकाश की आँखों में रातों का सूरमा सितारों की गलियों में गुजरते रहे मेहमां मचलते हुए चाँद को कैसे दिखाए कोई शमा छुप छुपकर जब चाँद हो रहा है जवां चकोर को डर भोर न...


  • गरीबी

    गरीबी

    गरीबी मनुष्य के जीवन में एक मिट्टी की मूर्ति के समान स्थायीत्व और चुपचाप सबकुछ देखकर सहने के लिए मजबूर करती है शायद उसकी यही मजबूरी उसके जिन्दगी के सफर में एक कोढ़ पैदा कर देती...


  • चाँद

    चाँद कुछ अरसे पहले ये चाँद बेटा था मेरी नानी का इसमें परियों का डेरा था हिस्सा था उनकी कहानी का….. साथ खेलते खेलते न जाने कब साथी बन गया सपनों का ये मेरी आँखों में...

कविता