सामाजिक

नीरीह बेचारी हाथी माँ को मौत के घाट उतारने वाले हैवान को मृत्यु दण्ड मिलना चाहिए

वह इस धरती की करूणा, ममता, दया, स्नेह आदि मानवीय गुणों से भरपूर, एक धारित्री या माँ थी, उसके दिल-दिमाग में कुछ बहुत कोमल भविष्य के सपने थे, उस सपने में इस दुनिया को सृष्टि के सबसे अनमोल, अद्भुत, अद्वितीय, स्निग्ध, अतुलनीय, सुकोमल एक शिशु के रूप में उपकृत करते हुए की एक बहुत ही […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हम मनुष्य कहलाते हैं परन्तु क्या मनुष्य बनने का प्रयत्न करते हैं?

ओ३म् मनुष्य स्वयं को मनुष्य कहता है परन्तु मनुष्य किसे कहते हैं, इस पर वह कभी विचार नहीं करता। हमारे वैदिक विद्वान बताते हैं कि मनुष्य को मनुष्य विचारशील तथा सत्य व असत्य का मनन करने के कारण से कहते हैं। मनुष्य के पास बुद्धि होती है जिससे वह उचित–अनुचित, सत्य–असत्य, कर्तव्य–अकर्तव्य, धर्म–अधर्म, न्याय–अन्याय, पक्षपात […]

विज्ञान

आर्यभट और भास्कराचार्य के सूत्र ‘पाइथागोरस’ प्रमेय से लिए गए हैं ?

आर्यभट और भास्कराचार्य के सूत्र पाइथागोरस आधारित हैं ? ग्रीस गणितज्ञ पाइथागोरस, जिनका जन्मवर्ष 580 BC से 572 BC के बीच है, तो मृत्युवर्ष 500 BC से 490 BC के बीच है, जिन्होंने “कर्ण^2 = लम्ब^2 + आधार^2” प्रमेय दिया । दो भारतीय गणितज्ञों, यथा- आर्यभट, जिनका जन्मवर्ष 476 AD और मृत्युवर्ष 550 AD है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लबों पे लेकर निकले हैं इंकलाब का नारा लोग, बदलेंगे तस्वीर वतन की हम जैसे आवारा लोग, ऐसी आँधी आएगी ज़ालिम तू भी बच ना पाएगा, सीना तान कर खड़े हुए हैं बेघर बेसहारा लोग, कर लीं जितनी करनी थी फरियादें गूँगे बहरों से, अब ना दोहराएंगे ऐसी गलती कोई दोबारा लोग, कशकोल नहीं शमशीरें […]

ब्लॉग/परिचर्चा

यादों के झरोखे से- 21

                                (विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर विशेष) पर्यावरण-ब्लॉग्स और पाठकों की प्रतिक्रियाएं हमारे पाठक इतनी नायाब प्रतिक्रियाएं लिखते हैं, कि उन अप्रतिम प्रतिक्रियाओं में अनमोल जानकारियां समाहित होती हैं. हमें लगता है, कि इन जानकारियों को ब्लॉग के रूप में […]

कहानी

बल्लू की गाँव वापसी (कहानी)

बल्लू की गाँव वापसी (कहानी) “भूरी सुनो!! रसोई में जितने भी डिब्बे हैं, सभी ठीक से देखलो, जहाँ -जहाँ भी तुम पैसे छुपा कर रखती हो। कहीं और भी रखें हों तो वहाँ भी देखलो। पिछले पंद्रह दिन बीत गए मेरे पास तो अब एक फूटी कौड़ी भी नहीं बची”। शाम को बल्लू ने अपने […]

कविता

क्षमा नहीं करने वाली

केरल में देखो ऐसा अवसर भी आया है, शिव के पुत्र गजराज ने भी स्वयं को निर्बल पाया है। माँ की ममता, भूख की ज्वाला सबकुछ उसके अंदर थी, मानव से भोजन की आशा, उसके अंतर मन थी। देख कर कुछ युवक भोजन के साथ आये है, क्या पता था उस गज गामिनी को मौत […]

पर्यावरण

हमें धरती को बचाने के लिए ईमानदारी से प्रयास करने ही होंगे

(5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में ) इस पूरे ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी ही हरी-नीली अभिनव रंगों से आभायुक्त अभी तक एकमात्र ग्रह है,जिस पर सांसों के स्पंदन से युक्त चलते फिरते जीव ,रंग-बिरंगी तितलियों,चिड़ियों,फूलों, फलों से लदे हरे-भरे,पेड़-पौधे,लताएं,नीला इन्द्रधनुषी आकाश,रिमझिम बरसात,पेड़-पौधे, जंगलों और बर्फ से ढके पहाड़,हरे विशालकाय घास के मखमली अंतहीन […]

पर्यावरण

पर्यावरण पर लॉकडाउन के पड़े हैं सकारात्मक प्रभाव

पर्यावरण की चिंता करने वाले और उसे लेकर अपने स्तर पर लगातार प्रयास करने वाले लोगों और संस्थाओं के लिए विश्व पर्यावरण दिवस ( 5 जून) लॉक डाउन के कारण स्वच्छ हुई प्रकृति को निहारते हुए आंतरिक खुशी प्रदान करने वाला है। स्वच्छ नदी, स्वच्छ हवा और वातावरण में आया यह बदलाव भाग-दौड़ भरे जीवन […]