नवीनतम लेख/रचना

  • गज़ल

    गज़ल

      2122 1212 22 / 112 मोसमी दाब है बयानों से बात बनती नहीं सितारों से | जुर्म है ये तरस किनारों से । हो गई दुश्मनी नजारों से। हाल दिल का ज़ुबाँ नही कहना, बात...

  • लघुकथा

    लघुकथा

    “इन्तजार” कुम्भ के मेले में बिछड़ एक बुढिया सीढियों पर बैठी अपने परिवार का इन्तजार कर रही थी| तभी एक सज्जन की नज़र उस पर पड़ी और पूछा, “माताजी, अब कोई नहीं आएगा, तुम्हारा परिवार तुम्हें...

  • गीतिका

    गीतिका

    अंध मिटाकर दिया जलायें दर्द भुलाकर ख़ुशी दिलायें ! आज अगर सो गया जमाना क्यूँ न चलो हम उसे जगायें ! राह बड़ी मुश्किलों भरी है सोच समझ कर कदम बढायें ! छोड़ परे जो लिखा...


  • देश को हैशटैग मत करो !!

    देश को हैशटैग मत करो !!

    इस समय देश में सुलगाए गए मुद्दे मानवीय भावनाओं के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील हैं, लेकिन इन पर संवेदनाएं जताने वालों की भावनात्मक शुद्धता का प्रतिशत कितना परिशुद्ध है, इसे स्वयं उनसे बेहतर कोई नहीं समझता।...

  • बेटियां

    बेटियां

    मोम की गुड़िया सी कोमल होती है बेटियां माता पिता के दुलार में पलती है बेटियां अनजान घर की बहू बनती तब भी बेटी का ही रूप होती है बेटियां खुदा की सौगात ,जमा पूंजी का...

  • सरस्वती वंदना

    सरस्वती वंदना

    हे माँ मुझे, रोशनी दे ज्ञान की दूर कर  अज्ञानता हाथ में वीणा पुस्तक मोर पंख सुशोभित मस्तक, तू ज्ञान है विधाता ओ ममतामयी, करूणामयी इतनी कृपा मुझ पर पर करना मैं सदा चारी बनूँ। सत्य...

  • दोहे

    दोहे

    जैसे भी हो जोड़िये,दिल से दिल के तार। निजता में होती नहीं, कभी जीत या हार।। शीशे के घर में नहीं, मिल सकता है चैन। पत्थर रोज उछालते, लोग यहां दिन रैन।। अपनी भाषा से मिला,अपनी...



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