नवीनतम लेख/रचना




  • कुण्डली

    कुण्डली

    योगी साहब देखिए, मरकर भी कमलेश हमको, तुमको, सभी को, दे गै इक संदेश दे गै इक संदेश, ‘”हमें तो बैर नहीं है’। भारत में भी अब हिंदू की खैर नहीं है” । कह सुरेश करिए...

  • फिर सदाबहार काव्यालय- 45

    फिर सदाबहार काव्यालय- 45

    “एक नन्ही-मुन्नी के प्रश्न ” मैं जब पैदा हुई थी मम्मी, तब क्या लड्डू बांटे थे? मेरे पापा खुश हो कर, क्या झूम-झूम कर नाचे थे? दादी-नानी ने क्या मुझको, प्यार से गोद खिलाया था? भैया...

  • कर्म पथ पर

    कर्म पथ पर

    कर्म पथ पर हमेशा मैं चलती रहूंगी | धर्म कर धर्म के संग बढ़ती रहूंगी | चलो माना कि पथ है कठिन सत्य का , तो भी चलकर मैं कर चुकता करती रहूंगी | जिंदगी में...

  • हाइकु (नव-दुर्गा)

    हाइकु (नव-दुर्गा)

    हाइकु (नव-दुर्गा)P शैलपुत्री माँ हिम गिरि तनया वांछित-लाभा। ** ब्रह्मचारिणी कटु तप चारिणी वैराग्य दात्री। ** माँ चन्द्रघण्टा शशि सम शीतला शांति प्रदाता। ** चौथी कूष्माण्डा माँ ब्रह्मांड सृजेता उन्नति दाता। ** श्री स्कंदमाता कार्तिकेय की...


  • सोभावती छंद (हिन्दी भाषा)

    सोभावती छंद (हिन्दी भाषा)

    सोभावती छंद (हिन्दी भाषा) देवों की भाषा से जन्मी हिन्दी। हिन्दुस्तां के माथे की है बिन्दी।। दोहों, छंदों, चौपाई की माता। मीरा, सूरा के गीतों की दाता।। हिंदुस्तानी साँसों में है छाई। पाटे सारे भेदों की ये खाई।। अंग्रेजी में सारे ऐसे पैठे। हिन्दी से नाता ही तोड़े बैठे।। भावों को भाषा देती लोनाई। भाषा से प्राणों की भी ऊँचाई।। हिन्दी की भू पे आभा फैलाएँ। सारे हिन्दी के गीतों को गाएँ।। हिन्दी का...

  • नम आँखें

    नम आँखें

    आज बिट्टू चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी । उसकी सारी सहेलियां अपने मम्मी पापा के साथ पूजा की छुट्टियों में घुमने जा रहे थे। प्रणय को समझ में नहीं आ रहा था...