नवीनतम लेख/रचना

  • पिया की पाती

    पिया की पाती

    पाती प्रिय के नेह की आंखों में आँसू भर जाती है पंथ तुम्हारा निहारकर धूल मुझे दे जाती है । प्रियवर तुम्हारा प्रेम निमंत्रण पढ़कर पलकें मेरी झुक जाती हैं , जैसे मुरझाये हृदय में पीर कोई...




  • क्रिकेट और बैटिंग

    क्रिकेट और बैटिंग

    उस दिन, मेरे वे अन्तरंग मित्र, जिनके साथ बचपन में क्रिकेट भी खेल चुका था, आते ही मुझसे पूँछ बैठे थे, “और क्या हाल-चाल है..बैटिंग-वैटिंग ठीक-ठाक चल रही है न..?” उनकी इस बात पर अचकचाते हुए...



  • कानून

    कानून

    आंखो पर पट्टी बांधकर  निष्पक्ष होकर कर रहे हो फैसला या बांध लिए है  चक्षुओं को इस कदर कि अब  अपराध ही तुमको नहीं दिख रहा तस्वीरों में तुला के दोनो पालने  दिखते तो है संतुलित...

  • कानून

    कानून

    आंखो पर पट्टी बांधकर  निष्पक्ष होकर कर रहे हो फैसला या बांध लिए है  चक्षुओं को इस कदर कि अब  अपराध ही तुमको नहीं दिख रहा तस्वीरों में तुला के दोनो पालने  दिखते तो है संतुलित...

  • एक खत

    एक खत

    साजन भेज रहीं हूँ  तुम्हें  हौसले से लिखा एक खत यकीन मानों इसमें   शामिल नहीं हैं मेरा कोई दर्द और आंसूओं के एक एक कतरे से महफूज रखा है शब्दों को   ताकि तुम्हारी दृढ़ संकल्पित...

राजनीति

कविता