नवीनतम लेख/रचना

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुझको सच कहने की बीमारी है इसलिए तो ये संगबारी है अपने हिस्से में मह्ज़ ख़्वाब हैं,बस! नींद भी, रात भी तुम्हारी है एक अरसे की बेक़रारी पर वस्ल का एक पल ही भारी है चीरती...




  • दोस्ती

    दोस्ती

    जिनकी नीयत होती है साफ़, उनके दिल में हम धडकते हैं , जिनकी नीयत में खोट है उनकी आँखों में हम खटकते हैं, सावन की बहार आ जाती है चुपके चुपके जो गरजते हैं वह बादल...

  • नदी को मनुष्य का दर्जा

    नदी को मनुष्य का दर्जा

    नैनीताल हाइकोर्ट ने गंगा और यमुना को मनुष्य का दर्जा दिया है । क्या कोई ऐसी अदालत है जहां मनुष्य को नदी का दर्जा दिया जा सके । आप सोचेंगे ये क्या पागलपन है । हाँ...


  • एक और एक ग्यारह

    एक और एक ग्यारह

    एक बडे अस्पताल के प्रतिक्षालय में दो औरतें बैठी थी । दोनों ने बातचीत शुरू करने के उद्देश्य से यहाँ आने का कारण पूछा तो पता चला कि नयना जो कि विधवा है उसका बेटा कैंसर...

  • कविता

    कविता

    कविता मात्र एक रचना नहीं एक अक्स होता है किसी दिल का मेल होता है भावों का उमड़कर बादलों की तरह आते हैं जो बरसते हैं फिर स्याही के रूप में लेते हैं आकार अक्षरों की...


राजनीति

कविता