कविता

कोरोना तुम कहाँ से आए हो और क्यों?

कोरोना तुम कहाँ से आए हो और क्यों? मैंने चीन में लिया है जन्म, मानव को सद्बुद्धि देने आया हूँ मैं, डरो नहीं मुझसे! बस रखो थोड़ा ध्यान, स्वच्छता और सफ़ाई का। ज़रूरी हो तभी निकलो घर से, मुँह पर लगाकर मास्क, और हाथों में पहनकर दस्ताने, जेब में रखो साबुन या सेनिटाईजर। करलो ध्यान […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज ने वैदिक धर्म का पुनरुद्धार और देशोत्थान का कार्य किया

ओ३म् ऋषि दयानन्द (1825-1883) के समय में सृष्टि के आदिकाल से आविर्भूत ज्ञान व विज्ञान पर आधारित सत्य सनातन वैदिक धर्म विलुप्त हो चुका था। इसके स्थान पर देश में वैदिक धर्म का स्थान अविद्या, अन्धविश्वास, पाखण्ड, सामाजिक असमानता, पक्षपात व अन्यायपूर्ण व्यवहार तथा परम्पराओं से युक्त मत-मतान्तरों ने ले लिया था। मूर्तिपूजा, फलित ज्योतिष, […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर है और वह अनुमान व प्रत्यक्ष प्रमाणों से सिद्ध है

ओ३म् प्रायः सभी मत-मतान्तरों में ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है परन्तु उनमें से कोई ईश्वर के यथार्थ स्वरूप को जानने तथा उसका अनुसंधान कर उसे देश-देशान्तर सहित अपने लोगों में प्रचारित करने का प्रयास नहीं करते। ईश्वर यदि है तो वह दीखता क्यों नहीं है, इसका उत्तर भी मत-मतान्तरों के पास नहीं […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर सुयोग्य व पात्र भक्त व उपासकों की प्रार्थना स्वीकार करता है

ओ३म् मनुष्य अपने पूर्वजन्म के कर्मों वा प्रारब्ध के अनुसार इस सृष्टि में जन्म लेता है। उसने जो कर्म किये होते हैं उनका सुख व दुःख रुपी फल उसे अवश्य ही भोगना होता है। जाने व अनजानें में मनुष्य जो कर्म करता है उसका कर्म के अनुसार परमात्मा की व्यवस्था से फल अवश्य मिलता है। […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा वेदज्ञान न देता तो अद्यावधि सभी मनुष्य अज्ञानी व असभ्य होते

ओ३म् वर्तमान संसार अनेक भाषाओं एवं ज्ञान-विज्ञान से युक्त है। इन सब भाषाओं एवं ज्ञान-विज्ञान का विकास कैसे व कब हुआ, इस प्रश्न का उठना स्वाभाविक है। इन प्रश्नों का समाधान खोजने का सबको प्रयत्न करना चाहिये। हम जानते हैं कि संसार कि सबसे पुरानी सभ्यता वैदिक सभ्यता है। इस सभ्यता का आविर्भाव वेदों की […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चार पैसे के लिए जो छोड़कर घर-द्वार आये। सोचते हैं वो मुलाज़िम क्यों यहाँ बेकार आये? कल उजाले से मिटेगी ये भयावह रात काली, ये न समझो ज़िंदगी की हर ख़ुशी को हार आये। ख़्वाहिशें कुछ ख़्वाब लेकर उड़ चले थे जो पखेरू, फड़फड़ाते जाँ बचाते लौटकर लाचार आये। कैद करना चाहता जब आदमी आबो-हवा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अफ़वाहों का बाज़ार गरम है। हुआ आदमी बिना शरम है। उनको लाले पड़े जान के , फैलाते कुछ यहाँ भरम हैं। करते राजनीति लाशों पर, निंदा करने योग्य करम है। धर्मध्वजा लेकर जो फिरते, लूट मचाना बना धरम है। क़ुदरत का जब डंडा पड़ता , तब होता आदमी नरम है। नियम और क़ानून न माने, […]

गीतिका/ग़ज़ल

पहली बार मिला

खुद से खुद को ही मिलने का अवसर यह पहली बार मिला लॉक डाउन ने मौका ये दिया जीवन को नया उपहार मिला जीवन की कलम सच की स्याही कुछ हर्फ उभरते आते हैं और नए फूल खिल जाते हैं जिनको ऐसा गुलजार मिला कुछ लोग ढूढते हैं कमियां बस ये न मिला बस वो […]

गीत/नवगीत

भगवा किया तुमने कोरोना

भगवा दिया है भगवा किया, तुमने कोरोना; हर हिय को सिखा कुछ है दिया, प्यार कराना! करने लगे हैं नमस्कार, संस्कार फुर; हैं शाकाहारी होने लगे, तुमसे गए डर! नर नारी चोट खाए गहरी, देख बीमारी; यह महामारी आई करने, कुछ है विचारी! फुलवारी सारी सजी रहे, उसकी तैयारी; कुछ घास फूँस झाड़ फूँक, करती […]

गीत/नवगीत

जनता कर्फ्यू के विरोधियों को संदेश

भारत मां की खातिर, कितनों ने कुर्बानी दीन्हा, तुम कहते हो,”हमको घर में नजरबंद कर दीन्हा”। इसी वतन की खातिर, सावरकर ने क्या-क्या झेला, अंग्रेजों ने पांच दशक तक,उनको रखा अकेला, काल कोठरी में रहकर के,गारा खून-पसीना, कोल्हू को, बैलों-सा जिसने हांफ-हांफ कर ठेला। भूल गया पच्चास वर्ष जो, दिन या साल-महीना, तुम कहते हो, […]