नवीनतम लेख/रचना

  • राम का मंदिर

    राम का मंदिर

    अयोध्या नगरी के पास फैजाबाद में एक गरीब परिवार रहता था । दशरथ प्रसाद दिहाड़ी मजदूर था । वह एक छोटी से झोंपड़ी में अपने इकलौते पुत्र बजरंग और पत्नी के साथ रहता था । जो...

  • संयोग पर संयोग-9

    संयोग पर संयोग-9

    ब्लॉगराजकुमार भाई से मुलाकात  एक बार फिर संयोग पर संयोग की बात करते हुए हम राजकुमार भाई से मुलाकात करने चलते हैं. यों तो राजकुमार बहुत हैं. हर एक पुत्र अपने माता-पिता का राजकुमार होता है. राजकुमार...

  • झांसा

    झांसा

    ”धरती मां, आज तुम महाविनाश के कगार पर कैसे पहुंच गई हो? तुम तो सर्व समर्थ थीं. रत्नगर्भा, सुजलां, सुफलां, शस्य श्यामलां… आज इतनी बेबस क्यों?” ”मैं भी तुम जैसी मूक और सहनशील जो हो गई...

  • गीतिका

    गीतिका

    आ गया नव वर्ष प्यारे अब तो मुझसे प्यार करतेरी यादों में जिया हूँ मत मुझे बेकरार कर जिंदगी कैसे चलेगी हर तरफ सिसकारियामौत से लड़ना पडेगा इसलिये तकरार कर चैन से मरना नहीं तो जिन्दगी...

  • मचलती तमन्नाओं ने

    मचलती तमन्नाओं ने

    मचलती तमन्नाओं ने आज़माया भी होगा बदलती रुत में ये अक्स शरमाया भी होगा पलट के मिलेंगे अब भी रूठ जाने के बाद लड़ते रहे पर प्यार कहीं छुपाया भी होगा अंजाम-ए-वफ़ा हसीं हो यही दुआ...

  • डिस्को लाइट: एक कारगर उपाय

    डिस्को लाइट: एक कारगर उपाय

    आज डिस्को लाइट के बारे में कुछ पढ़ने को मिला. क्या, वह तो हम अंत में बताएंगे, लेकिन हमने सोचा क्यों न डिस्को के बारे में कुछ ज्ञानवर्द्धन किया जाए. चलिए सबसे पहले यही जान लेते...

  • नवगीत – झाड़ रहे हैं पल्ला

    नवगीत – झाड़ रहे हैं पल्ला

    बेच रहे वे सपने कब से मचा-मचाकर हल्ला देखो कैसा खेल चल रहा उनका खुल्लम-खुल्ला आसमान के चाँद सितारे धरती पर लायेंगे बिजली की परवाह नहीं सूरज नया उगायेंगे चाहे कोई इनको कहता फिरता रहे निठल्ला...

  • कविता

    कविता

    यह मन दीवाना अलबेला सा न जाने किसे ढूंढता रहता फड़फड़ाता बेचैन होकर नरम कोमल पंखों से उड़ान भरने को आतुर ढूंढ रहा अनजाना प्यारा सा हमसफर जो लेकर साथ अपने खो जाये दूसरी दुनिया में...

  • लघुकथा – प्रसव पीड़ा!

    लघुकथा – प्रसव पीड़ा!

    निशांत को सहसा उस दिन की याद आ गई, जब सीमा को प्रसव के लिए वह अस्पताल लाया था. सीमा प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी, छटपटा रही थी.“स्थिति नाज़ुक है, बच्चा ऑपरेशन से ही होगा।”...

  • तन्हाई….

    तन्हाई….

    जब भी तन्हाई में होती हूँ वो नजर आता है निगाहें स्थिर हैं गति मंथर है धड़कनें सामान्य हैं जिंदगी रोजमर्रा की सी है जरा वक्त बैठी हूँ लॉन में अनायास ही वो नजर आता है...

कविता