नवीनतम लेख/रचना



  • दिलखुश जुगलबंदी-7

    दिलखुश जुगलबंदी-7

    एक वैलेंटाइन यह भी न जाने कहाँ से इक ख्याल आया, ख़ामोशी से शब्दों को था पिरोया, बहती हवा में शब्द लहराते चले गए, दिलखुश जुगलबंदी सृजित करते चले गए. खामोशी का तरन्नुम कुछ निराला है,...

  • गज़ल

    गज़ल

    आँखों में धुआँ है, सीने में उबाल भी चलन है जुदा-जुदा बदली है चाल भी ======================== कुछ तो मैं फितरत से ही हूँ थोड़ा आलसी कुछ छोड़ता नहीं मुझे उनका ख्याल भी ======================== खुद तो बातचीत...

  • भरोसा भाग 1

    भरोसा भाग 1

    “नहीं, नहीं, नहीं क्षितिज अब और यह सब मुझसे नहीं होगा। अपने आप पर बहुत जुर्म कर लिया मैंने। तुम्हारी बातें मैंने बहुत मान ली। तुम्हारी बातें मानते मानते, मैंने अपने अंतर्मन को ही मार दिया।...

  • गर्व

    गर्व

    गर्व फूलों की दुकान में बहुत चहल पहल हैं हो भी क्यों नही आज चौदह फरवरी जो है । नवयुवक युवतियां आ कर अपनी अपनी पसंद के गुलाब ले रहे है । अपने आभासी प्रेम का...


  • बौद्धिकता के नाम पर वैचारिक प्रदूषण

    बौद्धिकता के नाम पर वैचारिक प्रदूषण

    हमारे देश में एक विशेष जमात हमारी परम्पराओं और धार्मिक मान्यताओं पर निरंतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुठाराघात करने में लगी रहती हैं। इस वर्ग विशेष के अनेक नाम हैं जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ता, एक्टिविस्ट,सिविल...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जीना मुश्किल था कभी जिनका हमारे बीना आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं, हमें देख कर कल निगाहें झुका ली गैरों के लिए आज तैयार हो गये हैं, वो वो नहीं रहें अब...


कविता