नवीनतम लेख/रचना

  • *वाणी पर संयम*

    *वाणी पर संयम*

    उस दिन देवम की कक्षा में टीचर पढ़ा रहीं थीं, कोई गम्भीर विषय चल रहा था। लेकिन पीछे दो छात्र आपस में बात करने में इतने तल्लीन थे कि वे भूल ही गये कि वे कक्षा...


  • अजीब ये दुनियॉ

    अजीब ये दुनियॉ

    अजीब ये दुनिया अजीब ये सिलसिला क्यों लड़ते हैं लोग क्या मिलता है इन्हें बीज बोते हैं ये तो पौधें उगेंगे ही काँटा बोयेगें ये तो काँटा चुभेंगा ही क्यों नही सोचते लोग कि उपर वाला...

  • नन्हे नन्हे बालक

    नन्हे नन्हे बालक

    नन्हें – नन्हें बालक हो उपवन सा सालोने हो! आँगन की फुलवारी हो मीठी सी मुस्कान हो! सबको मीठे बोल सुनातें माता- पिता के आँख के तारें! बागो में खिले फूल हो सबमे महक बिखेरे हो!...

  • मेरे गिरधर

    मेरे गिरधर

    मेरे गिरधर सुन्दर सालोनें वंशी बजाये पनधट जाये मटकी फोड़े यमुना तट पर चीर चुरावे मधुवन बीचे गाय चरावें काली दह में नाग को नाथे कृष्ण सुदामा की मित्रता सारा जग जाने माता यशोदा के आँख...

  • अजीब है दुनिया

    अजीब है दुनिया

    अजीब ये दुनिया अजीब ये सिलसिला क्यों लड़ते हैं लोग क्या मिलता है इन्हें बीज बोते हैं ये तो पौधें उगेंगे ही काँटा बोयेगें ये तो काँटा चुभेंगा ही क्यों नही सोचते लोग कि उपर वाला...


  • पुतले,पुतले

    पुतले,पुतले

    पुतले,पुतले चहूँ ओर पुतले निर्जीव की भेष में सजीव के भेष में लेकिन दोनों कहलाते पुतले करते कार्य अजीबोग़रीब निर्जीव ने जो दिखाया सजीव ने नहीं कर पाया निर्जीव का चमत्कार सजीव नहीं कर पाया पुतले...

  • साहित्य की आवाज़

    साहित्य की आवाज़

    अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग के नाम पर कहते हैं लोग- पैसा दीजिएगा रचना को जगह मिलेगी नहीं दीजिएगा प्रकाशित नहीं होगी समझ नहीं आता साहित्य से पैसा या पैसा से सहित्य यह कैसा अद्भुत खेल साहित्यिक...

  • किताब….

    किताब….

    ऐ जिंदगी…. लिखूंगी तुमपर एक किताब हर एक कोरे पन्नें पर उकेरुंगी तेरे साथ बीते हर लम्हें का हिसाब ऐ जिंदगी… लिखूंगी तुमपर एक किताब कभी प्यार भरे मीठे प्रेमसिक्त एहसास तो कभी टकरार में आँसुओं...

राजनीति

कविता