लघुकथा

सलीका

फूल जानते हैं- कैसे खामोशी-आनंद से खिलना है. नदी समझती है- कैसे भरी बरसात को सहेजना है. सागर को ज्ञात है- कैसे नदियों के असीम प्यार को समेटना है, फिर कभी ज्वार से तो कभी भाटे से सूर्य और चन्द्रमा के आकर्षण बल को संतुलित करना है. सूर्य जानता है- कैसे स्वयं असहनीय तपिश को […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उन्हें क़ातिल बताया जा रहा है। लहू जिनका बहाया जा रहा है।। समंदर से चला दरिया पलट कर, पहाड़ों पर चढ़ाया जा रहा है। नियत खोटी हुई है आदमी की, मुहब्बत को सताया जा रहा है। नहीं मालूम हैं जीवन के मानी, उसे तो बस बिताया जा रहा है । फ़क़त इंसान अंधा इस कदर […]

गीत/नवगीत

भादों की बारिश में

छिपी बहुत सी गहरी बातें, भादों की बारिश में। वसुंधरा की धानी चुनर से, निसर्ग हुआ नयनाभिराम। शीतल आर्द्र पवन ने देखा, गगन हुआ घनश्याम। दादुर ने कुछ सुना ही दिया, भादों की तारीफ में। छिपी बहुत सी…। लहरा उठे हैं आँचल, इठलाती हुई नदियों के। तन-मन प्रफुल्लित हैं आज, पहाड़-पर्वत घाटियों के। झूमना याद […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मृत्यु बनाम अमरत्व

‘मृत्यु अटल सत्य है ‘यही जीवन का सबसे बड़ा सत्य और सारतत्व है।अगर कोई किसी को ‘अमरता ‘का वरदान देने का ढोंग रचता है, तो इससे महा झूठ और छद्म कुछ हो ही नहीं सकता ! चाहे वह महाभारतकाल हो, रामायण काल हो या कोई भी कालखण्ड हो, कितनी बिडंबना है कि अश्वत्थामा को ‘अमरता […]

गीतिका/ग़ज़ल

सन्तुष्टि

गरीबी को भी ओढ़ना और बिछाना जानता हूँ भूख से व्याकुल भले ही, मुस्कुराना जानता हूँ। अभावों में भी सन्तुष्टि, लक्ष्य जीवन का रहा, झोपड़ी में बच्चों संग, महल का सुख जानता हूँ। हैं बहुत तन्हां महल, सब रहें अलग अलग, बच्चों से हो बात कैसे, दर्द महल का जानता हूँ। अर्थ को समर्थ समझते, […]

कविता

बदलता हुआ वक्त

वक्त के पन्नों पर सब कुछ बदल जाएगा जो लिखा है नसीब में वो भी मिल जाएगा। सोचा न था जो कभी वो भी कुछ-कुछ खोकर मिल ही जाएगा। संभाल सकते हो तो संभाल लेना उस वक्त को जो खोने वाला है। क्योंकि खोए हुए वक्त के साथ अपने भी खो जाते हैं और पराए […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा लेख स्वास्थ्य

श्रावणी का वैदिक स्वरूप

श्रावणी का वैदिक स्वरूप प्रियांशु सेठ श्रावण माह अज्ञानियों के लिए ज्ञान का संदेशवाहक बनकर आता है और जनसामान्य को कल्याणपथ पर चलने की ओर प्रेरित करता है। गर्मी के बाद जब वर्षा होती है, तो मानव चित्त वातावरण के अनुकूल होने से शान्त रहता है तथा मन प्रसन्न रहता है। श्रावणी का उत्सव इसी […]

कविता

जीवन की गाड़ी फिर से पटरी पर होगी

..…………………………………….. आज गम है जीवन में कल खुशी भी होगी तनिक ठहरो उदास चेहरों पर हँसी भी होगी ये लम्हे जो तुमको लग रहे हैं आज कठिन राहें चार कदमों के बाद आसान भी होगी। कुछ सपने जो देखे हैं तुम्हारी आंखों ने मंजिलें पाने की जिद की है ख़्वावों ने थोड़ी सी मेहनत और […]

लघुकथा

शादी यानी बर्बादी

एक पुरानी कहावत है ‘शादी यानी बर्बादी’ …. लेकिन फिर भी दोनों पार्टी इन्हें अपने गलें में वर मालों के रूप ‘अदला-बदली’ करते है ! सामाजिक दवाब के कारण भी और सबसे बड़ा कारण …’एक रात का आनंद यानी सुहागरात’ के मस्तियों के कारण …. यदि ‘इस रात के आनंद के कारण’ को हम साइड […]

लघुकथा

सच्ची शुभकामना

आनंद गाँव के उत्साही युवक हैं । ज्ञात हो, भारत के प्राय: गाँव-क़स्बे में कोई न कोई सैनिक अथवा सैन्याधिकारी के परिवार रहते हैं । हमारे तरफ से उनके परिवार को प्रत्येक पर्व-त्यौहारों में हस्तलिखित सुन्दर-से स्केचिंग कर शुभकामना-सन्देश रजिष्ट्री-डाक से भेजे जाय, ताकि सैनिक परिवार इसे फ्रेमिंग कर रख सके और रजिष्ट्री शुल्क के […]