गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सारे शहर में चर्चा ये सरेआम हो गया दोस्ती से ऊपर हिंदू इस्लाम हो गया खड़ी कर दी मज़हब की दीवार तो सुन अब भगवान मेरा परशुराम हो गया गिरे हो तुम जबसे मेरी इन नज़रों में तेरी नज़रों में काफ़िर मेरा नाम हो गया कामयाबी मिल सकती थी तुझको लेकिन नापाक था साजिश तेरा […]

गीत/नवगीत

अनुरोध

हिय!निवेदन एक तुमसे,मत व्यथा के गीत गाना। प्राण में भरकर अमिय प्रिय,इस जगत को है हँसाना।। स्वार्थ में डूबे मनुज को, आभास है क्या त्याग का। मीत को जो छ्ल रहा नित, है अरि वही अनुराग का। सुप्त क्यों शुचि भावनाएँ,मन! तनिक इनको जगाना।। प्राण में भरकर अमिय प्रिय,इस जगत को हैै हँसाना।। ईश की […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

आँख से खुदगर्ज़ी का पर्दा हटा कर देखना फासले माग़रूरी के सारे मिटा कर देखना ============================ पाप धुल जाएंगे तेरे पूरे उस सैलाब में दूसरे के गम में कुछ आँसू बहा कर देखना ============================ जुम्बिश-ए-मिजगां में मिट जाएगी सारी तीरगी उम्मीद की छोटी सी एक शमा जला कर देखना ============================ जानना हो बीतती है दिल […]

लघुकथा

“अवाक”

दो भक्त मंदिर प्रांगण में खड़े थे. पहला कुछ देर तक मंदिर की भव्यता और मूर्ति की सौम्यता को निहारने के बाद बोला, “इसके निर्माण में मैंने रात-दिन एक कर दिये. पिछले दिनों यह नगाड़ा सेट लाया हूं. बिजली से चलने वाला. अरे भाई, आज के जमाने में बजाने की झंझट कौन करे?” फिर स्विच […]

बाल कविता

बाल कविता

मेरा सोना बच्चा सोएगा । मीठे सपनों में खोएगा । जहाँ लड्डू बर्फी भरे पड़े। चॉकलेट के पेड़ हैं बड़े बड़े । जहाँ दूध की नदियाँ बहती हैं , और बहुत सी परियाँ रहतीं हैं । हैं बादल कॉटन कैंडी जैसे , इन्हें खाए बगैर रहूँ कैसे । गुड्डे ,गुड़िया और टेडी बियर , मुझको […]

गीत/नवगीत

निर्भया और स्वर्ग

निर्भया और स्वर्ग ____________ बादल बीच लगाकर सीढ़ी ,स्वर्ग द्वार खोला| किरणों से ले ज्योति पुंज ,घर में अपार घोला| स्वर्णिम आभा ले धरती पर स्वर्ग बसाया हमने – पर हैवानों से जीवन का तार-तार डोला| मैंने अपने सपनों को परवान चढ़ाया था| अरमानों की लगा सीढियाँ स्वर्ग बसाया था| बीच बैठ बादल के रथ […]

कविता

मेरे सपनों का भारत

मेरे सपनों का भारत कहां होगा लुटते अस्मिता नारी का देखा ज्वाला बहती चिंगारी का देखा, मानवता को गिरते देखा उजाले को घिरते देखा, मेरे सपनों का भारत कहां होगा कृषि प्रधान देश का नाम है कृषक को आत्महत्या करते देखा, बदनाम गिरगिट रंग बदलने में माहिर नेताओं को इसमें देखा, मेरे सपनों का भारत […]

कविता

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र का सत्तरवाँ साल उमंग उत्सव वेमिशाल जोश से भरे चेहरे खिले तिरंगा देख मौज मस्ती करते मिले। जनतंत्र का यह गणतंत्र दिवस रखता है खास महत्व समरसता को संजोकर सपनो में खड़ा रहता है अड़िग आड़म्बर। कभी न डगमगाने देता कभी भी न बहकने देता जरा सी गुस्ताखी करने वालो की हमेशा औकात बता […]

समाचार

विश्वशांति मानव सेवा समिति, मुखपत्र- शांति पथ का विमोचन व सम्मान समारोह कार्यक्रम सम्पन्न 

आगरा | यूथ हॉस्टल सभागार, संजय पैलेस (आगरा) में विश्व शांति मानव सेवा समिति द्वारा प्रथम वर्षगांठ व पत्रिका ‘ शांति पथ ’ (प्रवेशांक) का विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमें सर्वप्रथम माँ सरस्वती के सम्मुख श्री नवीन जैन आगरा शहर महापौर), डॉ0 अमी आधार निडर, डॉ0 शशि पाल वर्मा, संतोष कुमार निषाद हर्ष, […]

कविता

आखिर क्यों??

बहन, मां, बेटी हो तुम, पत्नी और प्रेयसी हो तुम। तुम ही गीता ,रामायण हो, तुम ही सृष्टि की तारण हो। कितने किरदारों में ढलती हो? फिर क्यों अबला बन फिरती हो तुम सुमन किसी फुलवारी की, तुम जननी किसी किलकारी की। आंचल में ममता की धार है, चुनौतियां भी सभी स्वीकार हैं। फिर क्यों […]