गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अजीब शोर हैं एहसास के मिरे दिल में, ग़ुबार दिल का ये आँखों से निकाल देते हैं। ज़हर पियेगा भला कौन इन हवाओं का, मिज़ाजे शिव सा साँसों में खुद की ढाल देते हैं। अगर यक़ीन को हो खौफ बेवफ़ाई का, तो इस ख़याल पे मिटटी ही डाल देते हैं । ये दर्दो ग़म भी […]

कविता

मुक्तक

घुल गया झूठ नफ़स में हर इक इंसा के अब जान जोखिम में हो तो सच किसको सूझे चौंचले हैं सब व्यंजन भारी जेबों के पेट खाली हो तो फिर रस किसको सूझे बाद तेरे इस तरह हमने गुज़ारी जिंदगी याद के जेवर पहन आशा सँवारी जिंदगी साहिलों की खफगियों से दिल डरा कुछ इस […]

कविता

बचपन का चाँद

आज चाँद को सब ने देखा बस मुझे ही नज़र नही आया जब कोशिश करती उसे देखने की बचपन नज़र आ जाता था तब कैसे भागते थे छत पर ये पूर्णिमा के चाँद का गोला उसकी सुनहरी चाँदनी की छटा उफ कैसे पागल कर देती थी सब बच्चों में होड़ लग जाती थी कौन इस […]

कविता

मन …….

ए मन तू उदास मत हो | सुख -दुःख तो आनी हैं , कष्ट आएंगे उसे सहना होगा | फिर से तुम्हें सम्भलना होगा , ए मन तू उदास मत हो | सूरज फिर से उदय होगा , कल नया सवेरा लाएगा | अपनी रौशनी से जग को जगमगाएगा , ए मन तू उदास मत […]

कविता

माँ-

तुम्हारी गोद में सर रखकर अपने गम हल्के करता था | तुम थी तो हर दिन खुशियों का था | तुम मेरे आँसू भी मोती से कर देती | मेरी खुशियों को और बड़ाती , तुम थीं तो सब कुछ अच्छा था | तुम नहीं तो देखो खुशियां भी कोई नहीं बांटता | खुशी हो […]

कविता

ज्योतिष सम्राट आर्यभट्ट

बिहार की इस पावन धरती पर जन्म लिया एक ज्योतिष सम्राट, दुनिया को सच दिखायी जिसने आर्यभट्ट की है ये कला विराट। पाटलीपुत्र में उस विद्वान ने ज्योतिष शास्त्र का किया अध्ययन, ग्रह-नक्षत्र की खोज कर उसने अंधविश्वासों का किया खंडन। उसी ने कहा पृथ्वी गोल है ये सूर्य का चक्कर लगाती, अपने धूरी पर […]

आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 8)

कम्प्यूटर विभाग में नये सहयोगी मैं ऊपर लिख चुका हूँ कि एडवांसशीट के कार्य के कारण मंडलीय कार्यालय से हमारा टकराव हुआ, जो भगवान की कृपा से ठीक-ठीक हल हो गया। इससे कुछ समय पहले ही मेरे विभाग में दो नये अधिकारी आये, जो संयोग से दोनों महिलायें थीं। उनमें से एक श्रीमती माला भट्ट […]

लघुकथा

लघुकथा : लुत्फ़

“रफ़्ता-रफ़्ता वो मेरे …”, “चुपके-चुपके रात-दिन आंसू …”, “पिया रे, पिया रे … लागे नहीं म्हारो जिया रे”, एक से बढ़कर एक खूबसूरत ग़ज़लें, नज्में, सूफियाना गीत-संगीत के नशे में राजेश डूबा हुआ था। शाम का समय। कक्ष में हल्का अँधेरा और डी. वी. डी. प्लेयर से आती मदहोश करती आवाज़ें। कभी महंदी हसन, कभी ग़ुलाम अली […]

कविता

~भ्रष्टाचार~

कौन नहीं है भ्रष्टाचारी जरा हमें भी बतलाओ स्वयं को नेक कहने वाले जरा अपने गिरेबान में झांक के आओ | भ्रष्टाचार है ऐसी बीमारी जो सभी को लगती है एक बारी कोई तो बताये हमें व्यक्ति ऐसा जिसने ना काम किया हो कभी ऐसा -तैसा | कभी ना कभी तो लिया है या फिर […]