नवीनतम लेख/रचना


  • स्त्री

    स्त्री

    अत्याचार व्याभिचार प्रताड़ना अवमानना चारो दिशाओं से विषमताओं से घिरी हुई स्त्री का जीवन सागर के सीने पर टापू का होना है फिर भी अपनी सौम्यता कर्मठ्ता गहनता से रचती है सृष्टि मिले ना मिले उसको...


  • शपथ ग्रहण समरोह

    शपथ ग्रहण समरोह

    अक्सर देखा जाता है कि किसी किसी मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समरोह एक बहुत बड़े सार्वजानिक मेले की रूप में मनाया जाता है. मेरे विचार में किसी भी संवैधानिक पद का शपथ ग्रहण करना एक अनिवार्य...


  • साहस

    साहस

    गाँव में स्कूल नही था । कारण गाँव में जो बस आती थी वो दूसरे दिन ही वापस जा पाती थी । कोई भी अध्यापक गाँव में रहना नही चाहता था। सरपंच ने अपने स्तर पर...

  • यशोदानंदन-४

                 गर्गाचार्य के पास कोई विकल्प शेष नहीं रहा। उन्होंने समस्त उपस्थित जन समुदाय को अपना-अपना स्थान ग्रहण करने का निर्देश दिया और स्वयं अपना आसन ग्रहण करने के पश्चात्‌अपना कथन...

  • ~~शिक्षा~~

    ~~शिक्षा~~

    “आज रिटायर हो गया सुगन्धा | ” “अरे कैसे-क्यों ? तबियत तो ठीक है न ! अभी आपकी नौकरी के तो चार साल बाकी है |” “नहीं रे ‘पगली’ ‘प्यार’ से रिटायर हुआ | आज बहू...


  • कविता : याद

    कविता : याद

    याद की शक्ल कभी पहचानी नहीं होती… किस लम्हे में किसकी याद आये इसका भी कोई गणितीय फ़ॉर्मूला नहीं है… तो फिर क्यूँ मैं तुमसे जुड़ी रहना चाहती हूँ … हिचकियों से, शाम के रंग से,...

कविता