नवीनतम लेख/रचना

  • यशोदानंदन-३

     महर्षि की बातें यशोदा जी बड़े ध्यान से सुन रही थीं। जैसे ही ऋषिवर ने अपना कथन समाप्त किया उनके मुखमंडल पर एक विशेष आभा प्रकट हुई। नेत्रों में एक चमक आ गई। अधरों पर एक...


  • पहला प्यार

    पहला प्यार

    नीरा के दिन की शुरुआत ही रजत के मैसेज से होती थी | ढेरों मैसेज और मिस्ड काल नीरा के मोबाइल मे आये हुए रहते थे | पर आज नीरा ने उठने के साथ मोबाइल चेक...






  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 30)

    27. स्नेह बंधन बगलाना के महल में राजकुमारी देवलदेवी का कक्ष, गुजरात के राजकुमार भीमदेव एक सज्जित आसन पर बैठे हैं और उन्हीं के सम्मुख राजकुमारी देवलदेवी विराजमान हैं। थोड़ी दूर पर एक शय्या है, जिस पर रेशमी...

  • अंजुरी भर सपने

    अंजुरी भर सपने

    पोल के नीचे अक्सर वह दिखती पुरानी किताबों के कुछ पन्ने कुछ जोड़ तोड़ कर टूटे फूटे शब्द बोल बोल कर पढ़ने की कोशिश करती वह बड़ी अफसर बनना चाहती थी चुपके चुपके देखती अपने अधूरे...

कविता