नवीनतम लेख/रचना



  • यह कैसी समाज सेवा

    यह कैसी समाज सेवा

    देश का तो पता नहीं पर सुना है हमारे शहर आगरा में ही कईngo हैं, फिर भी इतने गरीब सड़को पर नंगधडंग वह भी ठण्ड में रहते है भला कैसे-क्यों …रह रह सवाल मन में गूंज...

  • शरीफों का मुहल्‍ला

    शरीफों का मुहल्‍ला

    जाड़े की धूप में बैठकर गप्‍पें हॉकी जा रही थीं। चाय व समोसे के सहारे वे बातें कर रहे थे। ‘’भई श्रीवास्‍तव इधर आना जरा।’’ एक आवाज गॅूजी। ‘’नहीं यार हम यहीं ठीक हैं,’’ श्रीवास्‍तव चाय...


  • सृष्टि का काल चक्र

    सृष्टि का काल चक्र

    आधुनिक वैज्ञानिक अब कहते हैं कि हमारी सृष्टि में अनगिनत ग्रह प्रति दिन पैदा हो रहे है और कई ग्रह अपना समय पूरा कर के विलीन हो रहै हैं – लेकिन हिन्दूग्रंथ तो आधुनिक वैज्ञानिकों से...




  • सबके हृदय में

    सबके हृदय में

    मैंने अब तक स्वयम को देखा ही नही पता नही मेरा घर मेरे बारे मे क्या सोचता होगा अशोक के पेडो को या सूर्य-मुखी के पौधों को मेरा इन्तजार होगा मेरा शहर मुझे ढूंढता  होगा सड़कों  पर...

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