नवीनतम लेख/रचना

  • चपाती

    चपाती

    चपाती कितनी तरसाती गरीबों की थाली उसे नजर नहीं आती इतनी शान बान अचंभित हर इंसान चांदी के बर्तनो में परोसी गयी चपाती पर यह क्या, हाथ में रह गए सिर्फ ड्रिंक और चमचमाती थाली में...


  • मुझ लौह को भी कर दो कुन्दन

    मुझ लौह को भी कर दो कुन्दन

      तुम अविनाशी ब्रह्म ज्ञान, मैं व्यथित हृदय का हूँ क्रन्दन तुम पारस पाषाण प्रिये मुझ लौह को भी कर दो कुन्दन   तुम अकल अक्रोधन प्राप्य प्रिये, प्रियता हो जीवन की मैं मात्र अकृतात्मन हूँ...

  • कविता : कुदरत की माया

    कविता : कुदरत की माया

    अजब दिख रही है कुदरत की माया भादो की काया पर सूखे की छाया खेत प्यासे पड़े. सारे चिंतित किसान पानी न मिलेगा तो कैसे उपजेगा धान मौसम का रुख देख हर दिल घबराया अजब दिख...

  • आखिर क्या है कविता ???

    आखिर क्या है कविता ???

    मुझे नहीं पता आखिर क्या है कविता ! शायद प्रकृति का अवर्णनीय सौंदर्य है कविता ! शायद किसी प्रेमिका के अप्रतिम रूप का बखान है कविता ! शायद निश्चल प्रेम की विस्तृत परिभाषा है कविता !...




  • गाय के आँसू

    गाय के आँसू

    गौशाला का कर्मचारी थान के पास बैठी गाय को बड़े प्यार से उठाने लगा| गाय का मालिक उम्मीद भरे कदमो से चलकर कर्मचारी के पास आ गया था| इस अवस्था में अपना घर छोड़ कर गौशाला...

  • लघु उपन्यास : करवट (सातवीं क़िस्त)

    दिव्यशक्तियों सी अनुभूति कराने वाला, धूल धूसरित रहने वाला रमुवा, सफेद ऐप्रन पहनकर आला गले में शिवशक्तियुक्त, गांव और पूरे पंचायत का मसीहा बन कर सभी की उम्मीद का डाक्टर रामकुमार अपने कहरान की ओर देवता सा आ रहा...

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कविता