नवीनतम लेख/रचना

  • आज का आदमी

    आज का आदमी

    आँधियाँ भी नहीं बुझाती कभी चिरागों को इस तरह , आज इंसानियत को जिस तरह से मिटाता है आदमी, महासागर की लहरें भी नहीं उछलती ज्वार में इस तरह, अपनी दौलत के नशे में ,आज ज्यों...

  • बालगीत- आरती

    बालगीत- आरती

    आरती घर में सबकी बड़ी दुलारी नन्ही बिटिया आरती । अम्माजी का हाथ बंटाती, कभी काम से ना घबराती चौका-बर्तन करे, और घर- अंगना रोज़ बुहारती । थके, खेत से बापू आते, तुरन्त खाट पर हैं...




  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इश्क में इन्कलाब होने दो।सारा चेहरा गुलाब होने दो।। बंदिशें टूट गयी हैं साकी ।पूरी महफ़िल शराब होने दो।। इतनी फितरत है क्यूं सवालो में।तश्नगी बे हिसाब होने दो ।। अब तो तौहीने मुहब्बत न करो।सुर्खियों...

  • जीवन के ज़ानिब से

    जीवन के ज़ानिब से सच का सामना आसां तो नहीं मौत का दामन सुर्ख सा इन्सान बेपरवाह फिर भी अश्क के समन्दर में भी खिलखिलाहट लिए फिरता है| मौन दरख्त पर पंख फैलाए हुए परिन्दे खोखले...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      दौरे मजहब को भुनाते रहिए। खास जुमलों को सुनाते रहिए।। बचे ना कोई अमन का फतबा। सारे फतबों को डुबाते रहिए ।। कोई दरख्वास्त हुकूमत से करे । फ़ख्र से उसको झुलाते रहिए।। मयस्सर रोटियाँ...


  • संबंध  विच्छेद

    संबंध विच्छेद

    भरें हैं न्यायालय खचाखच भरे हैं महिला केंद्र प्रयासरत हैं निरंतर मध्यस्थता को तत्पर बता रहे हैं सबको अधिकारों की परिभाषा कर्तव्यों की व्याख्या मन का मन से सम्बन्ध व् संबंधों की पराकाष्ठा लोग सुन रहे...

राजनीति

कविता