नवीनतम लेख/रचना

  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी १७)

    14. काफूर और हसन सर्वाधिक खूबसूरत युवतियों को सुल्तान ने अपने हरम में भिजवा दिया। बाकी को अमीरों और अफसरों में बाँट दिए। दासों का भी वितरण किया गया, बेचा गया। कंचन सिंह का पुरुषांग काट दिया गया...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    पतंग छाए गगन में, लेकर नव-नव रूप। सतरंगी माहौल है, प्यारा और अनूप॥ गुड़ तिल और मिठाइयाँ, खावें हैं सब लोग। मकर राशि में रवि चले, प्यारी लागे धूप॥ दिनेश”कुशभुवनपुरी”

  • गीतिका

    गीतिका

    ये दिल सबका करता स्पंदन। उस दिल को है मेरा वंदन॥ नगर-नगर में बजा ढिंढोरा। गली-गली है महका चन्दन॥ प्रेम नगर की है ये भाषा। हर प्रेमी करता अभिनंदन॥ जात-पात को नहि ये माने। करलो चाहे...

  • गीतिका

    गीतिका

    ज़िंदगी की राह में, हम तो अकेले रह गए। कुछ कदम साथी चले, फिर राह में बिछड़ गए॥ दोष उनका था नही, वो तो मेरे साथी बने। कुछ कर्म ही ऐसे थे मेरे, छोडकर वो सब...




  • ह्रदय परिवर्तन….

    ह्रदय परिवर्तन….

    ”रामा ने पढना चाहा,पर घर वालो ने ने उसकी एक नहीं सुनी| आज ससुराल मे उसकी जो हालत है उसका कौन जिम्मेदार है ? वो खुद या उसके माता -पिता| सास ने कभी उसे एक नौकर...

  • दर्द

    दर्द

    “बाप दारू पीकर टुन्न हो जाता है, माई लोगो के घरो में चौका बर्तन करके सुबह शाम पेट की अग्नि शांत करने के जुगाड़ में रहती है। पढ़ने की तीव्र इच्छा ना जाने मुझमे क्यूँ पैदा...

राजनीति

कविता