नवीनतम लेख/रचना


  • सूरत या सीरत ……

    सूरत या सीरत ……

    सूरत को निखारने के लिए क्या कुछ नहीं हैं मार्किट में पर सीरत को क्या किसी तरह निखारा जा सकता है कभी भी नहीं कभी नहीं …. नामुमकिन है सूरत तो एक दिन ढल जाएगी पर...

  • दिलों की दूरियाँ

    दिलों की दूरियाँ

      पहले चलती थी पैसेंजर ट्रेन- आवाज आती थी, गाड़ी चलेगी तो पहुंचेगें, फिर आई एक्सप्रेस ट्रेन- यात्री बोले, गाड़ी चली है तो पहुँच ही जाएँगें, फिर आई राजधानी एक्सप्रेस, यात्रीगण बोलें, गाड़ी अभी चले- अभी...


  • अन्तर्मन की आवाज

    अन्तर्मन की आवाज

    मुझे बहुत हैरानी हुई पढे लिखे लोगो की मानसिकता देख।वो भीख नही मांग रही थी बेलून खरीदने को कह रही थी और इस सभ्य समाज के सभ्य दम्पत्ति जोङे ने दुत्कार कर भगा दिया उसे।दया भी...


  • ” बुढ़ापे की लाठी “

    दिसंबर महीने की बर्फीली  सर्दी में, सड़क  के किनारे एक बुज़ुर्ग  औरत, जिसकी उम्र ८० साल के लगभग थी, लकड़ी की छड़ी के सहारे काफी देर से सड़क पार करने की कोशिश कर रही थी |उसने...


  • ~नन्ही चिरैया~

    ~नन्ही चिरैया~

    “भैया आंखे बंद कर हँसते हो तो कितने अच्छे लगते हो|” गद्गुदी करती हुई परी बोली भाई खिलखिला पड़ा फिर जोर से| परी भी उन्मुक्त हंसी हंसती रही| दोनों हँसते-हँसते कहा से कहा आ गये थे|...

कविता