नवीनतम लेख/रचना

  • वह बचपन सुहाना

    वह मासूम नादान , वह नटखट  ज़माना बहुत याद आये मुझको ,वह बचपन सुहाना | जब थे नन्हे बच्चे , मां की गोद बिछौना बाहों  का झूला , वह झुंझने का खिलौना बेफिक्र नींद ,मीठे सपनों...

  • ख़ुशी

    ख़ुशी

    ‘सूरज,की पहली किरण जैसे ही धरती पर अपनी लालिमा बिछाती है…नीरू रोज सुबह सूरज निकलने से पहले ही उठ जाती थी…और सूरज का स्वागत करती थी | ये ही वो वक़्त था जिसे वो अपने लिये...



  • पुराने खंडहर

    पुराने खंडहर

    काल के अट्टहास के प्रतीक या शाश्वत रुपी सत्य का बोध कराते पुराने खंडहर ………………….. स्वयं में समेटे हुए अनगिनत कहानियाँ झूठ, सत्य,प्रेम, कुकृत्य … ना जानें कितनी निशानियाँ काल के दंश से … प्रकृति के...




  • सफलता का आधार परिश्रम

    सफलता का आधार परिश्रम

    (इस बार अपने छोटे भाई अरविन्द की लेखनी से निकली एक कविता प्रस्तुत है.) सफलता का आधार परिश्रम परिश्रम और सिर्फ परिश्रम ही हे– हर सफलता का आधार ,शार्टकट ले जाये तंग टेड़े -मेढे राहों पर ,न आगे...


राजनीति

कविता