नवीनतम लेख/रचना

  • कवितायेँ

    कवितायेँ

      समन्दर की मौजो में कभी खुश्क होता रहा सेहरा को भी कभी अपने अश्को से भिगोता रहा .. उसकी आँखों में नहीं है पहले से सैलाब अभी दर्द हुआ तो छिपकर दिल से कहीं रोता...

  • *******नदी*****

    *******नदी*****

    *******नदी***** ———————- कैसे कैसे बाधाओं से गुजर बनाई होगी धरती के सीने पर अपनी राह वही जानती होगी कभी पहाड़ रोड़ा बना होगा चाल उसकी मंद हुई होगी कभी तपती धरती ने सारा पानी सोख लिया...

  • “अजीज़ “

    “अजीज़ “

    “अजीज़ ” खुद से ही बाते कर लेता हूँ मैं ही हूँ अपना अजीज कितनी ही हो परिस्थितियाँ विपरीत पर छोड़ता नहीं हूँ मैं ..उम्मीद सच्चाई की राह पर तन्हा ही चलता हूँ सभी चेहरे लगते...


  • “फासिला”

    “फासिला”

    “फासिला” इज़हारे इश्क़ का अवसर खो दिया उसे तुम्हारी आँखों ने कह दिया चार सीडियों का फासिला रहा उसे ताउम्र मैने निबाह दिया शिकवा करूँ भी तो अब किससे इश्क़ ने बाक़ायदा मना कर दिया उसकी...

  • उपवास करवाचौथ का ??

    उपवास करवाचौथ का ??

    करवाचौथ … क्या ये उपवास लौटा सकता है ? उस विधवा के मांग का सिंदूर जो कुछ दिन पहले सीमा के पास रह रहे उस नवेली दुल्हन की सितारो वाली चुंदङी उड़ा कर ले गये क्या...


  • करवाचौथ

    करवाचौथ

    बस अब इन दिनो मे और जमकर मेहनत करनी है ये सोचता हुआ रामू अपना साईकिल रिक्शा खिचे जा रहा था।पिछले 8-10हफ्तो से वो ज्यादा समय तक सवारी ले लेकर और पैसे कमाना चाह रहा था।अपनी...



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