संस्मरण

मेरी कहानी – 47

यह चोरी की घटना से हम कुछ डर गए थे क्योंकि उस कुल्हाड़ी से अगर किसी की टांग काट जाती तो किया होता? सोच कर ही कंपकपी लग जाती। यों तो इस घटना को याद करके हम हँसते रहते थे लेकिन भीतर से हम सभी डरे हुए थे। अगर हम पकडे जाते और पुलिस स्टेशन […]

कविता

नज़्म

‘अन्नू’ अन्नू — तुम आज मुझसे रूठ कर जा रही हो इतने लम्बे सफर पर सो मैनें तम्हारे रस्तें में बिठा दिये है कुछ शज़र-बरगदों के उनकी हर टहनियों और हर पत्तियों पर लिखी हैं तुम्हारे लिए तुम्हारे नाम की प्यार भरी नज़्में अन्नू — जब चलते-चलते तुम थक जाना तो कहीं रुककर थोड़ा-सा आराम […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मानव का भविष्य एवं भविष्य का महामानव

यदि जीव-सृष्टि का क्रमिक विकास ही सत्य है तो प्रश्न उठता है कि मानव के बाद क्या? व कौन? यद्यपि अध्यात्म व वैदिक-विज्ञान जब यह कहता है कि मानव, सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ तत्व है, जो धर्म अर्थ काम व मोक्ष –चारों पुरुषार्थ में सक्षम है, तो संकेत मिलता है कि मानव अन्तिम सोपान है; हां […]

कविता

टूट जाते हैं लोग

सुना है टूट जातें हैं लोग अकड जाने के बाद दरक जाता है आइना इक चोट खाने के बाद बदल देते है लोग अपना घर भुतहा समझकर बदल जाती हैं राहें खुदबखुद ठोकरें खाने के बाद || पर आज कुछ अलग ही आलम है जमाने का हकीकत से दूर है अंजाम दिखने-दिखाने का इसी मोहल्ले […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मैं ब्रह्म नहीं अपितु एक जीवात्मा हूं।

ओ३म् मैं कौन हूं? यह प्रश्न कभी न कभी हम सबके जीवन में उत्पन्न होता है। कुछ उत्तर न सूझने के कारण व अन्य विषयों में मन के व्यस्त हो जाने के कारण हम इसकी उपेक्षा कर विस्मृत कर देते हैं। हमें विद्यालयों में जो कुछ पढ़ाया जाता है, उसमें भी यह विषय व इससे […]

कविता

बेटी का दर्द

में उडने के सपने संजोती रही,वो मेरे पंख काटते रहे। मे चन्द खुशियां तलाशती रही,वो मुझे घांव बांटतें रहे॥ कुछ यूं दी जमाने ने, बेटी होने की सजा मुझे। कि बेटों की फसल से ,जैसे खरपतवार छांटते रहे॥ सांसे तो क्या ,मेरी सोच तक पर पहरे बिठाऐं है सदमें मे हूं, तमाम प्रतिबंध सिर्फ मेरे […]

कविता

श्रद्धांजलि

भूल सकेगा नहीं देश यह गौरव का अभियान तुम्हारा । हे भारत के भाग्य विधाता तुमको शत सम्मान हमारा ।। भारत माँ के अमर लाल तुम । राष्ट्र शत्रु के महाकाल तुम । उन्नति की अभिलाषा लेकर । नव पथ की परिभाषा देकर । स्वाभिमान के हर अवसर पर। पूर्ण समर्पण आयुधबल पर। प्रहरी बनकर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका : एक विनम्र श्रद्धांजलि

सपूत मातृभूमि के, उठो कि माँ पुकारती । कलाम तुम चले कहाँ कि रो रही है भारती । नजर उठा के एक बार मुस्करा के देख लो । हर आँख आज नम हुई, तुम्हें ही है निहारती । उठो भरत की बेटियों, कलाम को करो विदा । सजा लो दीप थाल में, उतारो आज आरती […]

कविता

श्रद्धांजलि – एक भविष्य दृष्टा को

अखबार बाँटने से लेकर उनकी सुर्खियाँ बनने तक कागज के जहाज़ों से लेकर राकेट गढ़ने तक, साधारण से असाधारण कि सीढ़ियाँ चढ़ने तक, ऊँची-नीची हर तरह की डगर पर, न हताषा न थकान सदैव होठों पर लिये प्रारब्ध की मुस्कान बढ़ा जाता था वो एक अनवरत सफर पर। समस्याओं के समुंदर पार करता हुआ वो […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

बहुत खा ली खटाई अब मुझे अच्छी नहीं लगती। कि चीनी बिन मिठाई अब मुझे अच्छी नहीं लगती।। कि नेताजी को गद्दी की पड़ी आदत सुनो जबसे। सभाओं में चटाई अब मुझे अच्छी नहीं लगती।। — अमनचाँदपुरी