नवीनतम लेख/रचना

  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी ४)

    2. पाटन का रुष्ट ब्राह्मण दिल्ली की गलियों में दिल्ली की राजसी सड़कों पर एक ब्राह्मण धीरे-धीरे चल रहा था। यह मार्ग अलाउद्दीन के शाही दरबार की तरफ जाता था। उसके नंगे पाँव धूल-धूसरित थे।उसके कंधे पर...


  • गुलमोहर

    गुलमोहर

    गुलमोहर तुम स्वप्निल से अनुरागी मन लिए विषम स्थिति में भी अटल अडिग खड़े चिलचिलाती धूप में लहलहाते देते छांव तप्त मन को मिलता ठांव—– लाल नारंगी फूलों की छटा जैसे सावन की घटा नयनो को...

  • नफरत के बीज

    नफरत के बीज

    नफरत के बीज निकाल मन से, प्यार के फूल खिलाकर देख !! एक ही मजहब है सबका, इंसानियत अपनाकर देख !! बिना प्यार के सूना जीवन, धरती प्यासी,बिन सावन !! नफरत के बीज निकाल मन से,...

  • कविता : रिश्ते

    कविता : रिश्ते

    गलतियों की मांफी अपनों से ही मांग अटूट करते है रिश्ता धन्यवाद भी कह नही आँका जा सकता कोई रिश्ता आँखों में जो बसते है अपने होके वह दिल में उतर जाते है आंसुओ में कैसे...



  • क्षणिका

    क्षणिका

      गम की आंधिया उजाड़ ना दे चमन तेरा ढाल बन के सदैव तुम खड़ी रहना… प्यार से सींचना शाखाएं अपनी समय के थपेड़ो में मुरझाने मत देना …..सविता मिश्रा


  • चिड़िया

    चिड़िया

      लिये चोंच में तिनका चिड़िया देखती इधर उधर खोजती घने छांव वाला एक शजर पेट में दाना नहीं भूख से व्याकुल चिड़िया ढुंढ्ती आंगन वाला घर कड़ी धुप में भरती ऊंची लम्बी उड़ान प्यासी चिड़िया...