नवीनतम लेख/रचना

  • सच्चा प्यार

    रविवार का दिन था, दयाल चंद अपनी आलीशान कोठी के बाहर अपनी कार धो रहा था। कार धोने में , उसके दोनों  बेटे रवि और दीपू  भी उसकी सहायता कर रहे थे ।  वो दोनों पिता...



  • मैं और मेरा परमात्मा

    मैं और मेरा परमात्मा

    एक शाश्वत प्रश्न है कि मैं कौन हूं। माता पिता जन्म के बाद से अपने शिशु को उसकी बौद्धिक क्षमता के अनुसार ज्ञान कराना आरम्भ कर देते हैं। जन्म के कुछ समय बाद से आरम्भ होकर...

  • कविता : दहेज़ – २

    कविता : दहेज़ – २

    बहू ने जैसे ही घर में कदम रखा सास बोली- बेटी गहने जेवर उतार दो आजकल घर वालों पर भी भरोसा नहीं शादी ब्याह का घर है कहीं कुछ खो न जाये बहू बोली- मांजी, दूसरों...


  • ज़मीर

    ज़मीर

    पानी पर खिंच रहा हूँ लकीर मन मेरा न जाने क्यों है अधीर  रेत  पर लिखा हुआ तुम्हारा नाम  मिटा गया हैं अपनी उँगलियों से समीर  मुझ लहर को मिल  गया था किनारा  ख़्वाब देखने लगा...

  • हाइकु

    हाइकु

    चमका रवि खिला अमलतास थिरके पक्षी रवि प्रदीप तिमिर का प्रहरी तेजसमयी तपता रवि जले विटप तन गर्म ऋतु में निकल आया सूरज मुखी थाल रश्मि के साथ बीती रजनी प्रकट रश्मिरथ बिखरी रोली — शान्ति...

  • मधु यामिनी

    मधु यामिनी

      छिटकी हैं चांदनी अम्बर में सितारों के नूर से भरी बह रही हैं एक और मंदाकनी बादलों की ओट से पूनम का चाँद भी हमें झाँक रहा हैं तुम्हारे और मेरे मिलन की है यह...

  • बाल दिवस और चाचा नेहरू

    बाल दिवस और चाचा नेहरू

    (उनकी १२५ वीं जन्मोत्सव पर विशेष) अपने देशवासियों से मुझे इतना प्यार और आदर मिला कि मैं इसका अंश मात्र भी लौटा नहीं सकता और वास्तव में इस अनमोल प्रेम के बदले कुछ लौटाया जा भी...

राजनीति

कविता