कविता

नारी की पराधीनता

भारत को तो मिल गयी पूरी स्वाधीनता। कब खत्म होगी नारी की पराधीनता।। कभी पिता कभी पति की बनती है गुलाम, बुढ़ापे में फिर बेटा का भी सहती है निजाम, खूद निर्णय लेने की उसमें कभी न हुई क्षमता। कब खत्म होगी नारी की पराधीनता।। कागज पर तो मिले हैं उसे बहुत से आरक्षण, पर […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- सूट की नीलामी

एक राजनीतिक सभा में रामदेव जी के एक शिष्य ने कहा- अब हमारे स्वामी जी भी मोदी जी की तरह काम करेंगे वे भी अपना सूट नीलाम करेंगे मैंने कहा-आप हमें बेवकूफ समझते हैं स्वामी जी सूट कहाँ पहनते हैं? वो बोला-दूरदर्शिता के मामले में हमारे स्वामी जी आज भी आगे हैं कल भी आगे […]

कविता

हॉट सीन

कल शाम टहलते हुए अचानक कान में, कुछ शब्द पड़े “क्या हॉट सीन  है यार “, तुरंत मुड़के देखा कुछ आवारा लड़के, पोस्टर पर  छपी अधनंगी लड़की को देख चुहलबाज़ी कर रहे थे, उनके चेहरे के भाव उनके इशारों से मेल खा रहे थे, एक अजीब सी वितृष्णा ने मन को घेर लिया, विचारों के […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – ये कैसा तंत्र

  कैसी सोच अपनी है किधर हम जा रहे यारो गर कोई देखना चाहे वतन मेरे वह आ जाये तिजोरी में भरा धन है मुरझाया सा बचपन है ग़रीबी भुखमरी में क्यों जीवन बीतता जाये ना करने का ही ज़ज्बा है ना बातों में ही दम दिखता हर एक दल में सत्ता की जुगलबंदी नजर […]

इतिहास

शास्त्रार्थ और इसके दो शीर्ष विद्वानों का सौहार्द्र

महर्षि दयानन्द का मंगलवार 16 नवम्बर, 1869 को काशी के आनन्दबाग में अपरान्ह 3 बजे से सायं 7 बजे तक लगभग पांच हजार दर्शकों की उपस्थिति में विद्यानगरी काशी के शीर्षस्थ 30 पण्डितों से अकेले मूर्तिपूजा पर शास्त्रार्थ हुआ था। इस शास्त्रार्थ में सनातन धर्म वा पौराणिक मत के दो शीर्ष पण्डित स्वामी  विशुद्धानन्द तथा […]

बाल कविता

बालगीत – सर्दी ,गर्मी और बरसात

गर्मी गरम – गरम रसगुल्ला , सर्दी रबड़ी और मलाई , कॉफी – चाय सुड़कती सर्दी , गर्मी शरबत और ठंडाई | गर्मी कुरता – पाजामे पर , बड़ा अंगौछा डाल के आई , सर्दी  मफलर खूब   लपेटे , कोट पहनकर बांधे टाई | गर्मी ढूँढ़े पंखा – कूलर , सर्दी गरम  अंगीठी  लाई , […]

क्षणिका

क्षणिकायें

१-दोस्ती धीरे धीरे गहरी होती है दोस्ती सीप के भीतर बरसों रहने के बाद ही एक बून्द बनती है मोती २-चेहरा एक चेहरा तेरा मुझे याद रहता है हमेशा सलोना जिसे मेरी स्मृति नहीं चाहती है कभी भी खोना ३-ख्याल रूबरू मिलने से होता नहीं फायदा एक दूसरे के ख्याल यदि मिल जाएँ तो जीने […]

उपन्यास अंश

यशोदानंदन-३५

देवराज इन्द्र का आदेश पाते ही समस्त घातक बादल वृन्दावन के उपर प्रकट हुए। वहां निरन्तर बिजली की चमक, बादलों की गर्जना तथा प्रबल झंझा के साथ अनवरत वर्षा होने लगी। मोटे-मोटे स्तंभों के समान अविराम वर्षा करते हुए बादलों ने धीरे-धीरे वृन्दावन के संपूर्ण क्षेत्र को जलमग्न कर दिया। वर्षा के साथ तीव्र गति […]

कविता

कहां गया वो बचपन

कहां गया वो बचपन जब चौंतरे पर बैठी बुड़िआ को ताई कहकर बुलाते थे बदले में ढेरों आशीष पाते थे ! तब रेहड़ी पर ही चाट पकोड़ी और पापड़ी खाते थे ना कोई ऐडिकेट्स रुंगा मांगकर खाते थे ! खेल में ज्यादा पढ़ाई में कम समय लगाते थे बस होम वर्क कर शाबाश पाते थे […]

संस्मरण

मेरी कहानी -14

पीपलों की बात मैं पहले ही लिख चुका हूँ कि यह पीपलों की जगह एक बहुत ही अच्छी जगह थी जो हमारी गली जिस में हम रहते थे उस में दाखिल होने से पहले ही आती थी , इस लिए कोई भी शख्स गली में दाखिल होने से पहले पीपलों की ओर जरूर झाँक कर […]