नवीनतम लेख/रचना

  • हाइकु

    हाइकु

      संवारा तन मन प्रतीक्षारत बीतता वक्त अथ से इति नव काया वरण जीवन चक्र पिसती हिना शुभ वार त्यौहार सर्व मंगल चुन ली राह खत्म व्यूह विकल्प जीत संभव

  • दिल्ली की रावण लीला

    दिल्ली की रावण लीला

    राजधानी के रामलीला मैदान में 4 जून 2011 को ऐक रावण लीला हुयी थी जिस के कारण ऐक निहत्थी महिला राजबाला का देहान्त हो गया था। स्वामी रामदेव के योग-शिविर में उस रात निद्रित अवस्था में...




  • ख्याल

    ख्याल

      पेड़ भी रात भर सोचते होंगे पत्ते मेरे बारे में बोलते होंगे सितारे दूर आकाश से मुझे देखते हैं रात के सन्नाटे मेरे साथ जागते होंगे सरसराती हुई आती है ठंडी हवा कोहरे मेरे छत...

  • सावरिया गिरधारी (गीत १)

    सावरिया गिरधारी (गीत १)

    सावरिया गिरधारी ,हे माधव बनवारी सावरिया गिरधारी ,हे माधव बनवारी   अंखिया मूंदे बैठी रही मैं तुम तो निकट ना आये योग, ज्ञान, तप और उपासन सारे व्रत अपनाये यमुना तट तक दौड़ पड़ी कभी मधुवन निधिवन...

  • गीत : अपना गाँव-समाज

    गीत : अपना गाँव-समाज

    बड़े चाव से बतियाता था अपना गाँव-समाज छोड़ दिया है चौपालों ने मिलना-जुलना आज बीन-बान लाता था लकड़ी अपना दाऊ बाग़ों से धर अलाव भर देता था, फिर बच्चों को अनुरागों से छोट-बड़ों से गपियाते थे...

  • हार नहीं मानो तुम….

    हार नहीं मानो तुम….

    हार नहीँ मानो तुम हार नहीँ मानो तुम। टूटे मन से खडा कोई नहीँ होता, यूँ तो अंबर से बडा कोई नहीँ होता, छोटे छोटे पंछी तिनके जमा किया करते हैँ, घरौँदे पेडोँ पर बना लिया...

  • अभिव्यक्तियाँ

    अभिव्यक्तियाँ

      मेरे संभावित उपन्यास की तुम हो नायिका महाकाव्य हो मेरा तुम अनलिखा मन ही मन तुम्हें पढता रहता हूँ ख्यालों में तुम्हे बुनता रहता हूँ मेरे सपनो की तुम ही हो मलिका तुम न अपने...

कविता