नवीनतम लेख/रचना

  • जला आई हूँ मैं

    जला आई हूँ मैं

    जला आई हूँ मैंतुम्हारी रामायणजहाँ पूजा जा रहा थासीता को…बनाकर देवी-स्वरूपानहीं बनना था मुझे सीता नहीं देनी थी अग्नि-परीक्षा ना समाना था.. धरती की गोद में नहीं लेना था.. तमगा कोई पतिव्रता होने का ना भटकना...

  • तुम गए तो मेरी प्यास गई

    तुम गए तो मेरी प्यास गई

    तुम गए तो जैसे प्राण गए, मेरे जीवन की आस गई तर्षित थी मैं जन्मों से,. तुम गए तो मेरी प्यास गई जीवित तो…. अब भी हूँ मैं मैं हर्षित…. भी रह लेती हूँ तुम बिन चिंतन शून्य है पर मैं...

  • लघु कथा –    स्वार्थी

    लघु कथा – स्वार्थी

      दिवाकर नाथ अपनी पत्नी और इकलौते  बेटे राजेश के साथ एक शहर में रहता था। मुहल्ले  में  कोई  भी घटना होती , किसी पर भी कोई  भी मुसीबत आती तो दिवाकर नाथ उसे अनदेखा  करके,...








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