नवीनतम लेख/रचना

  • लघु कथा- “श्रद्धा”

    लघु कथा- “श्रद्धा”

    विनय पहली बार अपनी मम्मी के साथ मन्दिर जारहा था। रास्ते-भर माँ ने उसे अनेक उपदेश दिए, कि हमें हमेशा गरीबों की सेवा करनी चाहिए, जो दूसरों की सहायता करते हैं भगवान उसे वरदान देते हैं,...




  • रिश्ते

    रिश्ते

    जीवन के पीले पड़ चुके पन्नो में प्रेम का सुर्ख रंग भरना चाहती हूँ रिश्तों के दरकते नींव को विश्वास का आधार देना चाहती हूं पाषाण हुए दिलों में संवेद्नाओ के फूल उगाना चाहती हूँ तन-मन...

  • क्या तुम भी मुझसे ….

    क्या तुम भी मुझसे ….

    तुम्हारे ख्यालों तक मेरे ख्याल .. तुम्हारे सपनों तक मेरे स्वप्न .. तुम्हारी खामोशी तक मेरी खामोशी … क्या कभी पहुँच पायेंगे …? तुम्हारी परछाई से मेरी परछाई .. तुम्हारी तस्वीर से मेरी तस्वीर … तुम्हारी...

  • लघुकथा : धर्म

    लघुकथा : धर्म

    पति की लम्बी बीमारी से तंग हुई आभा ने आखिर पंडित की शरण ली | पंडित जन्मपत्री देखकर बोला ” कुत्तो को बिस्किट और कौओ को दही चावल खिलाओ, जल्दी ही आपके पति स्वस्थ होंगे |,गाडी...

  • कविता : बेटी

    माँ की आँखों का नूर, पिता का गुरूर होती है बेटी! घर की शान और अभिमान होती है बेटी! फ़ूलों की पंखुड़ी सी नाजुक, ओस सी पावन होती है बेटी! धरती पर ईशवर का दिया, अनमोल वरदान...



कविता