नवीनतम लेख/रचना

  • प्रेम – तीन क्षणिकाएँ

    प्रेम – तीन क्षणिकाएँ

    ये प्रेम भी अजीब चीज है पल भर में किसी को आपके लिए पूरा ब्रह्माण्ड सा ही बना देता है और उसे ही एक दुर्भाग्यपूर्ण पल में नजरों से गिराकर धूल में भी मिला देता है।...

  • खाली मुटठी

    खाली मुटठी

    आज वो बहुत उदास थी , कुछ भी नहीं सूझ रहा था उसे……। क्या अब तक उस ने जो भोगा  वो सब वो भूल जाये?….इतना आसान होता है क्या सब कुछ भूल जाना?? अपने दुःख से ज्यादा...



  • प्रकृति की सीख

    प्रकृति की सीख

    बाज लगभग ७० वर्ष जीता है, पर अपने जीवन के ४०वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं। पंजे...



  • महिमा डी जे की

    महिमा डी जे की

    ऐसे नाच रहे जैसे बिच्छू सबके काट रहे। ऐसे गाय रहे जैसे, चोरी करके भाग रहे।। सदाबहार गीतों को डी जे ने बर्बाद ही कर डाला मीठे रागों का अभाव, खरहा धुन सुनाय रहे। नागिन पर...


  • पहला ख़त  …

    पहला ख़त  …

    क्या ऐसी ही होती है मुहब्बत … ? ख्याल कागज़ पर लिखने लगते हैं नाम रंग आखों में उतर आता है ज़िन्दगी चुपके -चुपके लिखने लगती है नज़्म  …. आँखों की बेचैनियाँ खूबसूरती के सबसे सुंदर...

राजनीति

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