नवीनतम लेख/रचना

  • घना सहरा

    घना सहरा

      चाँद सा जिसका सुंदर चेहरा है उसकी चाँदनी ने मुझे आ घेरा है हर तरफ उजाला सा लगता है वहाँ का छंट गया अंधेरा है रात भर सपनों में तारो सा जगमगाते हो मेरे ख्यालों...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    काश ! कि गर हमदर्दी जताने की कला हमें भी आती काश ! फिर न दिल दुखता न आँखें ही दरिया बन पाती गैरों के दर्द को देखकर लगाते हमदर्दी के शब्दों का मरहम काश !...


  • कश्मकश

    कश्मकश

      उनकी नफरत में भी प्यार बहुत छुपा हुआ था दर्द अब तक है जो एक कांटा गहरा चुभा हुआ था रोज फूल सा खत मिलते रहने पर उल्फत की सादगी को गुमाँ हुआ था देह...

  • उम्मीद

    उम्मीद

    सारे दर्द का फ़साना, उम्मीद ही है, बूढ़े माँ-बाप का तराना, उम्मीद ही है। बड़े लाड-प्यार से पाला, बेटे को हमने, बुढ़ापे में बनेगा सहारा, उम्मीद ही है।   डॉ अ कीर्तिवर्धन


  • हाइकु

    हाइकु

    1 ठूँठ का मैत्री वल्लरी का सहारा मर के जीया। 2 शीत में सरि स्नेह छलकाती स्त्री फिरोजा लगे। 3 गरीब खुशियाँ बारम्बार जलाओ बुझे दीप को। 4 क्षुधा साधन ढूंढें गौ संग श्वान मिलते शिशु।...


  • मंझधार

    मंझधार

      बिना शब्दों के तुझे लिखने लगा हूँ क्षितिज से मै तुझे दिखने लगा हूँ शमा बनकर तू जल उठी है मै परवाने सा मिटने लगा हूँ जगमगाती सड़कें रात भर खामोश ही रहे टिमटिमाते तारों...

  • हाइकु ….

    हाइकु ….

    कुछ हाईकु अलग अलग बयानगी लिये …. फैलाए फन डसने को आतुर फरेबी वक्त …………..(1) बुझा चिराग जीवन अभिशाप लाचार बाप …………..(2) मैला आँचल बुझाती उदराग्नि माँ वैश्या नहीं …………(3) छू लेती नभ बेटियाँ दें सम्मान...

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