कविता

मुक्तक

पतंग छाए गगन में, लेकर नव-नव रूप। सतरंगी माहौल है, प्यारा और अनूप॥ गुड़ तिल और मिठाइयाँ, खावें हैं सब लोग। मकर राशि में रवि चले, प्यारी लागे धूप॥ दिनेश”कुशभुवनपुरी”

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

ये दिल सबका करता स्पंदन। उस दिल को है मेरा वंदन॥ नगर-नगर में बजा ढिंढोरा। गली-गली है महका चन्दन॥ प्रेम नगर की है ये भाषा। हर प्रेमी करता अभिनंदन॥ जात-पात को नहि ये माने। करलो चाहे जितना क्रंदन॥ अमर रहा है अमर रहेगा। हर प्रेमी जोड़ी का बंधन॥ दिनेश”कुशभुवनपुरी”

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

ज़िंदगी की राह में, हम तो अकेले रह गए। कुछ कदम साथी चले, फिर राह में बिछड़ गए॥ दोष उनका था नही, वो तो मेरे साथी बने। कुछ कर्म ही ऐसे थे मेरे, छोडकर वो सब गए॥ दोस्त न कहना मुझे अब, मैं बड़ा खुदगर्ज हूँ। मतलबी हूँ मैं बहुत, ऐसा वो मुझको कह गए॥ […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आओ, सर्वकामनासिद्धि हेतु वेदों के स्वाध्याय का व्रत लें

वेद हमें अपने आप से, ईश्वर से तथा इस ब्रह्माण्ड से हमारा परिचय कराते हैं। यह चार वेद वह ज्ञान है जो निराकार, सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, सृष्टिकर्ता ईश्वर ने सृष्टि की आदि में प्रथम उत्पन्न चार मनुष्यों को दिया था। वेद ज्ञान सम्पन्न होने के कारण इन्हें ऋषि कहा जाता है। इनके नाम अग्नि, वायु, आदित्य […]

राजनीति

अब दिल्ली विधानसभा के चुनाव हो गये बेहद रोचक

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधानसभा के चुनाव अबकी बार बेहद रोचक होते जा रहे हैं। इस बार के चुनावों में आम आदमी पार्टी के नाता अरविंद केजरीवाल का मुकाबला करने के लिए हर पार्टी अपनी पूरी ताकत लगा रही है। पहले दिल्ली विधानसभा के चुनाव केजरीवाल बनाम प्रधानमंत्री मोदी और 49 दिन बनाम मोदी सरकार […]

कविता

पूरे चाँद की रात

आज फिर पूरे चाँद की रात है ; और साथ में बहुत से अनजाने तारे भी है… और कुछ बैचेन से बादल भी है .. इन्हे देख रहा हूँ और तुम्हे याद करता हूँ.. खुदा जाने ; तुम इस वक्त क्या कर रही होंगी….. खुदा जाने ; तुम्हे अब मेरा नाम भी याद है या नही.. आज फिर […]

कहानी

ह्रदय परिवर्तन….

”रामा ने पढना चाहा,पर घर वालो ने ने उसकी एक नहीं सुनी| आज ससुराल मे उसकी जो हालत है उसका कौन जिम्मेदार है ? वो खुद या उसके माता -पिता| सास ने कभी उसे एक नौकर से ज्यादा नहीं समझा| यहाँ तक पति ने भी कभी प्यार से उसका नाम नहीं लिया ‘कल रामा बिटिया […]

लघुकथा

दर्द

“बाप दारू पीकर टुन्न हो जाता है, माई लोगो के घरो में चौका बर्तन करके सुबह शाम पेट की अग्नि शांत करने के जुगाड़ में रहती है। पढ़ने की तीव्र इच्छा ना जाने मुझमे क्यूँ पैदा की ऊपर वाले ने। जब लोगो के घरो की गंदगी ही साफ करनी मेरे नसीब में लिखा।” रामू के […]

कविता

वह पेड़ जो मेरा दोस्त है

बचपन से अब तक बस मेरी बाते सुनता है कहता कुछ नहीं उसे पत्तियों से लदा देख कर खुश होता रहा हूँ .पत्तियों से विहीन  उसकी ..डालिया देखकर दुखी होता रहा हूँ यह पेड़ मेरे बारे में सब कुछ जानता है पर वह मेरी आलोचना नहीं करता है उसकी पीठ पर कई बार मैं अपना […]

कविता

राहगीर

चला जा रहा चला जा रहा,कहाँ जा रहा कहाँ जा रहा,पता नहीं मुझे पता नहीं,कहाँ जा रहा पता नहीं। अपने दिल के अन्दर,लिए सुख दुख का समंदर,लिये दुखो का भण्डार,या फिर लिए सपने सुन्दर,पता नहीं मुझे पता नहीं,कहाँ जा रहा पता नहीं। अपनी मंजिल साथ लिए वहअपने दिल में आस लिये वहशायद करने कोई महान […]