सामाजिक

अनुकरण

अनुकरण का अर्थ है नकल करना। मनुष्य में अन्य जीवधारियों की तुलना में स्वाभाविक ज्ञान अत्यन्त कम होने के कारण वह शैशव अवस्था से ही अपने सभी नित्य कर्मों को बड़ों के अनुकरण के द्वारा ही सीखता है। जहां गाय आदि पशुओं के बछड़े पैदा होते ही कुलांचे भरने लगते हैं, वहां मनुष्य का बच्चा […]

कविता

विवाह वर्षगाँठ की शुभ कामना

‘जय विजय’ के प्रबंध सम्पादक विजय कुमार सिंघल एवं श्रीमती बीनू अग्रवाल के विवाह की २५वीं वर्षगाँठ के अवसर पर — आज यह शुभ दिन आया है,   नवीनता लिए प्रीत की डोरी में बंधा प्यार , — मोतियों की माला सा अटूट और पवित्र बंधन, शुभमय प्रीत का आलोक जगाता हुआ , नए नए […]

कविता

हमारे पिता

पिता हमारे बरगद जैसे, देते सबको छाया। जड़ें हैं इनकी इतनी गहरी, दिशा दिशा फैलाया। हर रिश्ता भाता है इनको, करते हैं सबका पालन। जो भी बुलाये प्यार से इनको, पधारें हैं उनके आँगन। लगते हैं ये नारियल जैसे, पर अंदर से हैं निर्मल। गुस्सा इनका देख सभी थर्राए, प्यार ऐसा कि सब घुल-मिल जाएँ। […]

सामाजिक

सत्य का ग्रहण और असत्य का त्याग ही मनुष्य का धर्म है

किसी विषय पर यदि दो बातें हैं, इनमें हो सकता कि एक सत्य हो और दूसरी असत्य या दोनों ही असत्य भी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में सत्य इन दोनों बातों से भिन्न हो सकता है। सत्य विचारों, सिद्धान्तों और मान्यताओं से जीवन में लाभ होता है और असत्य से लाभ तो कुछ नहीं […]

उपन्यास अंश

आत्मकथा : मुर्गे की तीसरी टांग (कड़ी 11)

हमारे आगरा आने के कुछ दिनों बाद ही बड़े चाचाजी ने बँटवारा करा लिया। आगरा आने के कारण हमारा खर्च बढ़ ही गया था। आमदनी कम हो जाने के कारण हमारी अर्थ-व्यवस्था और ज्यादा डगमगाने लगी। पिताजी के ऊपर काफी कर्ज पहले से ही था, खराब आर्थिक स्थिति के कारण वे ब्याज तक चुकाने में […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति

भारतीय मिडिया और दलित

6 दिसंबर पर रत्न बाबा साहब अम्बेडकर जी के महा परिनिर्वाण दिवस पर उनको कोटि कोटि प्रणाम। जिस तरह से आज भी बाबा साहब की उपेक्षा मिडिया करता है, दलितों के हक़ की उपेक्षा करता है उसी प्रकार बाबा साहब के समय भी करता रहा है । पेश है बाबा साहब और मिडिया पर एक […]

कविता

यादों में तुम्हारे ….

  यादों में तुम्हारे हरदम मैं खोया रहता हूँ तेरे सपनो के आगोश में मैं सोया रहता हूँ तुम कोहरे सा आकर रोज ओझल हो जाते हो वियोग सूत्र में अश्रु मोतियों सा पिरोया रहता हूँ शबनम से नम रहती हैं फूलों की आँखों सी पंखुरियाँ हृदय सरोवर में कमल बीज सा तुम्हें बोया रहता […]

इतिहास

दिल्ली का शिव मंदिर सत्याग्रह

आज एक अपने आपको सनातनी कहने वाले अज्ञानी व्यक्ति सुरेंदर सिंह ने स्वामी दयानंद की तुलना मुहम्मद गजनवी से यह कहकर करी की दोनों ने शिवलिंग तोड़े थे। सबसे पहले तो स्वामी दयानंद ने हिन्दू समाज में फैली अन्धविश्वास रूपी गली सड़ी मानसिकता को छोड़ने का आवाहन किया था। दूसरे स्वामी जी ने मनुष्य की […]

कविता

तांका- “फूल और उपवन”

  पुष्प महक, उपवन गुलाब, रंग-बिरंगा, भौंरा हो मदमस्त, खेले कलियों संग।   बिखरी छटा, चमन खिल गया, संग दिनेश,(सूर्य) कलियाँ हैं हर्षित, खिल सुमन हुई।   चमकी निशा,(रात्रि) देखकर चाँदनी, संग सुमन, महक उठा सर्व, रात रानी के संग।   चारों तरफ, शहनाई श्मसान, रात्रि-दिवस, पुष्प देता सम्मान, राजा-रंक समान।   दिनेश”कुशभुवनपुरी”