राजनीति

काश्मीरी पंडितो की उम्मीद पर गठबंधन सरकार

 पाकिस्तान की सोची समझी नीति का नतीजा ही है की पिछले कुछ दसकों से कश्मीर में क्रूरतम नर संहार का सिलसिला जो शुरू हुआ था वह आज तक पूरी तरह से थमा नहीं है । निर्दोष लोगों की हत्यायें, संस्कृति का तालिबानी कारण, साम्प्रदायिकता का वर्चस्व , राष्ट्र भावना का अभाव सब कुछ सुलभता से […]

कविता

ख़ाक हुई मंजिल संदली-सी…!

आसमान से गिरा परिंदा, देख बद्नीयत नर की, ख़ाक हुई मंजिल संदली-सी, लुटते हुए सफर की…! पंछी इस अनजान डगर पर रोज सवेरे आता, सेठ मगन का हरा बगीचा उसके मन को भाता, नहीं लुभा पाती थी उसको, कोठी संगमरमर की, ख़ाक हुई मंजिल संदली-सी, लुटते हुए सफर की…! रोजाना की तरह आया वो दाना […]

कविता

माँ मेरा मन

माँ मेरा मन चाहता है सौन्दर्य सृष्टि का देखना आने दो इस जग में मुझको खुशियाँ दूंगी मैं भी तुझको मत मारना अजन्मे ही मुझे कूड़े की ढेर पर मत फेंकना माँ मेरा मन………………….   बेटा ही यदि सब चाहेंगे तो बहू कहां से लाओगी तुम जब अकेले बैठोगी थककर फिर किससे बतियाओगी तुम मुझे […]

इतिहास

जानिए दलितों का भारत की आज़ादी में योगदान

अक्सर सवर्ण बंधुओ द्वारा यह प्रश्न किया जाता है की दलितों का आजादी की लड़ाई में क्या योगदान रहा है , वे गाहे बेगाहे सवर्ण क्रंतिकारियो की लिस्ट दिखा के यह साबित करने की कोशिश करते हैं की सारी आज़ादी की लड़ाई उन्होंने ही लड़ी बाकी अछूत दलित तो कुछ नहीं करते थे । यह […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

किसी को समर्पित — आप अपने लेखनी को मत छोड़ियेगा। हौसले के उड़ान को नहीं तोड़ियेगा। यह मिला हुआ गुण ईश्वरीय वरदान है , इस दुनिया में लावारिस मत छोड़ियेगा। पढने की बात रही सो पढा कीजिएगा, पढने के जरिये ही लेखन कीजिएगा। ज्ञानोदय में इसका भी अहम स्थान है, जिन्दगी के हिस्से में जगह […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल- अब हमदम को भूल गया

अपनी खुशियों में यों खोया मेरे गम को भूल गया. वो “मैं” में डूबा है जबसे तबसे “हम” को भूल गया. डूबे-उतरे-तैरे अब वो नदिया के सँग-सँग खेले, पर वो नदिया आई जहाँ से उस उद्गम को भूल गया. चारों ओर फसल लहराती दिखती उसके खेतों में, जिसने इन खेतों को सींचा उस मौसम को […]

उपन्यास अंश

यशोदानंदन-37

वह शरद-पूर्णिमा की रात थी। बेला, चमेली, गुलाब, रातरानी की सुगंध से समस्त वातावरण मह-मह कर रहा था। चन्द्रदेव ने प्राची के मुखमंडल पर उस रात विशेष रूप से अपने करकमलों से रोरी-केशर मल दी थी। उस रात मंडल अखंड था। वे नूतन केशर की भांति लाल हो रहे थे, मानो संकोचमिश्रित अभिलाषा से युक्त […]

कविता

किसी के रोकने से हम कहाँ रुकने वाले हैं …

कुछ अधूरे ख्वाब , आजकल मुँह चिढ़ाने लगे हैं ! हार मानने वाले हैं कहाँ, नित नये हौंसले हम जगाने लगे हैं !! राहों के पत्थर , रोकने की कोशिश रोज ही करते हैं ! डरकर मुसीबतों से भला , हम भी पथ अपना कहाँ बदलने वाले हैं !! मुस्कराती हुई मंजिल , अपनी बाँहें […]

आत्मकथा

आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 32)

मेरी पहली विदेश यात्रा (जापान यात्रा) कम्प्यूटर मेरा प्रिय विषय है। यह वास्तव में गणित की ही एक विकसित शाखा है। गणित में मेरी प्राकृतिक रुचि होने के कारण कम्प्यूटरों में भी मेरी रुचि बनी। मैं इसके लिए एम.स्टेट. के अपने शिक्षक श्री ब्रजेन्द्र कुमार लहरी का हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने इससे मेरा परिचय […]

ब्लॉग/परिचर्चा सामाजिक

उपभोक्ता को अपनी भाषा में उत्पाद सम्बन्धी जानकारी पाने का अधिकार कब दिलवाएगी सरकार ?

(यह पत्र एक सामाजिक कार्यकर्त्ता द्वारा भारत सरकार के खाद्य मंत्री तथा अन्य सम्बंधित अधिकारीयों को लिखा गया है. इसे हम उपयोगी समझते हुए यहाँ साभार प्रस्तुत कर रहे हैं.) महोदय, देश भर में सभी बड़ी कम्पनियाँ /विनिर्माता आदि अपने उपभोक्ता उत्पादों पर सारी जानकारी केवल अंग्रेजी में छापते हैं जिसे देश की 95 प्रतिशत […]