नवीनतम लेख/रचना





  • कविता : तन्हाई में चाँद पर नज़र…

    ठहर जाती हैजब कभी तन्हाई मेंइस चाँद पर नज़र………….रोजाना थोड़ा थोडाटूटता ही दीख पड़ता है……सब उसकी कलाएं समझते हैं नहीं समझते तोउसका छन्न से टूट जाना…… धीरे धीरे पूरा सफ़ेद वृत्त खंड खंड होकर टूट जाता है…. एक किरच भर नहीं...


  • उपन्यास : शान्ति दूत (छठी कड़ी)

    द्रोपदी के स्वयंवर में धनुर्वेद की कठिन प्रतियोगिता में ब्राह्मण वेशधारी अर्जुन के विजयी होने के बाद की घटनायें कृष्ण की आंखों के सामने स्वप्न की तरह घूम गयीं। एक अनजान ब्राह्मण युवक को प्रतियोगिता में सफल होते...




कविता