कविता

मैं किताब हूँ…

मैं किताब हूँ, जग की सारी उत्सुकताओं का जवाब हूँ, मैं किताब हूँ। मानव की हर खोज-खबर का, ऊँची नीची राह, डगर का, अगर-मगर का, तरह तरह के अनुभव- वैभव का हिसाब हूँ, मैं किताब हूँ। युद्ध-शांति का, क्रांत-क्रांति का, तेज-क्लांत का, सत्य-भ्रांति का, हर अशांति का, देव-दैत्य के कार्य कलापों का खिताब हूँ, मैं […]

कहानी

कहानी : लव जिहाद और आईने का सच

वो कस्बे में डर डर के रहता था। हालाँकि वो डरपोक नहीं था पर फिर भी डर – डर के रहना उसकी आदत हो गई थी। उसके डर की वजह भी थी। कोई आम नहीं बल्कि खास। उस कसबे की तीन-चौथाई आबादी हरे रंग की थी। वो गेरुए रंग का था और उसकी एक लड़की थी। […]

गीतिका/ग़ज़ल

कभी ख्वाबों में आती हो

कभी ख्वाबों में आती हो | कभी यादों में आती हो|| कभी बाहों में आ जाओ| मुझे यूं क्यों सताती हो || मेरा तुम गीत सुन-सुन के | उसी को गुनगुनाती हो|| थामा कर हाथ हाथों में| उसे फिर क्यों छुड़ाती हो| बड़ी प्यारी सी लगती हो | कभी जब मुस्कुराती हो|| — अरुण कुमार निषाद  

शिशुगीत

ओ मेरी राजदुलारी

तारों को साथ ले के तू आजा चाँद चकोरी मेरी बिटिया रानी रो रही सुना जा तू लोरी तुझे काजल टिका लगाऊँ मेरी लागे न नजर ओ मेरी राजदुलारी तुझे लगे मेरी उमर तेरे लिए रात काटती हूँ आँखों में तू बसी है मेरी लाडली हर साँसों में तेरी हर खुशी हर जिद्द मेरी जान […]

कविता

मन की बेताबी

जैसे किसी अजनबी ने बिखेर दिया हो सुर्ख गुलाबों की पंखुडियां सुबह की किरणें पहुँच चुकी है मन के आंगन में उजले-उजले से ……….. सर्द हवाओं ने बर्फ की चादरों पर ली है प्यार से अंगड़ाई………. पलकों पर सज उठे हैं अनगिनत गुलमोहर आंचल में सिमट गये हैं बेहिसाब सुर्ख फूलों की खुशबु हसीन हो […]

कविता

मैं दुखी हूँ …!!

मैं दुखी हूँ – अपने आप से नहीं, इस समाज से, पुरे समाज से नही, समाज में बिखरी हुई, विसंगतियों से। जो विश्वास के आड़तले, खड़ा होकर पुरा करते हैं, स्वर्थसिद्धि। मैं दुखी हूँ उनसे – जो जनता को धोखे में रखकर, अपने को नतृत्वकर्ता कहते है। सहारा लेते हैं – झूठे वादे, झूठे सपने, […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक : नहीं देखा

  दिल में समाकर जिसने, गुलिस्ताँ  नहीं देखा हमसफ़र बन साथ चलते, बागवाँ नहीं देखा मंज़िलें देखी बहुत ,प्यार पर एतवार नहीं कब राह चलते मिल गये, आसमाँ नहीं देखा — राजकिशोर मिश्र [राज] १२/०५/२०१५ प्रस्तुत मुक्तक मे —- रदीफ़ = नही देखा काफिया = गुलिस्ताँ , बागवाँ, आसमाँ में आ की मात्रा पर अनुस्वर (अं) काफिया […]

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ छंद

  निर्भर जो खुद पर रहे, मिले उसे पहचान। आस पराई जो करे, छोड़े उसे जहान। छोड़े उसे जहान, और वो दर-दर भटके। जीवन बन संत्रास, उसे फिर हर पल खटके। कह ‘पूतू’ कविराय, रहो घर अथवा बाहर। बैशाखी को छोड़, स्वयं पर रहना निर्भर॥1॥ नारी अपनी शक्ति को, अगर स्वयं ले जान। उसको इस […]

लघुकथा

आखिरी साड़ी

अब तो विमला के लिए होली का त्यौहार मात्र एक रस्म निभाने जैसा है। उनके परिवार में होली के ही दिन बहुत बड़ा हादसा जो हो गया था। बड़े बेटे के बच्चे की पहली होली थी। धूम धाम से उसके लिए पूजन की तैयारी चल रही थी। बस अब तो बुआ के ससुराल से आने […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

गौतम-अहिल्या-इन्द्र आख्यान का यथार्थ स्वरूप

ओ३म् रामायण में गोतम-अहिल्या का एक प्रसंग आता है जिसमें कहा गया है कि राजा इन्द्र ने गोतम की पत्नी अहिल्या से जार कर्म किया था। गोतम ने उसे देख लिया और इन्द्र तथा अहिल्या को श्राप दिये। रामायण के पाठक इसे पढ़कर इस घटना को सत्य मान लेते हैं। क्या यह सम्भव है कि […]