आत्मकथा

आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 17)

संघ के प्रचारकों के जो उदाहरण मैंने दिये हैं, वे विरले नहीं हैं। लगभग सभी संघ प्रचारक एक दूसरे से बढ़कर कर्मठ, हँसमुख, चरित्रवान्, सरल और त्यागी होते हैं। वे लौकिक अर्थों में भले ही संन्यास ग्रहण न करते हों, परन्तु कर्म से वे किसी संन्यासी के कम नहीं होते। सभी प्रकार के मोह, ममता, […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

प्यार करना सिखा जाना साथ मरना सिखा जाना चूम कर हाथ होठों से पीर हरना सिखा जाना दूर जाऊं तो आँखों में नीर भरना सिखा जाना जिन्दगी में जो आये दुःख धीर धरना सिखा जाना कूद जाऊं मुहब्बत में तू ही डरना सिखा जाना

कविता

मैं भारत की बेटी हूँ…

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर भारत की संस्कारवान  गुणवान बेटियों को नमन करते हुए मेरी एक रचना —- संस्कारों की नीव जमाती , हर पल आगे बढ़ती जाती , वेद ऋचाओं में भी मैं हूँ , आज गगन में पैर जमाती , नहीं किसी से हेठी हूँ , मैं भारत की बेटी […]

कविता

महिला दिवस पर विशेष …

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ०८ मार्च को  मनाया जाता  है | वैसे तो भारतीय सन्दर्भों मे प्रत्येक दिन ही महिला दिवस है क्योंकि सत्ता से घर तक महिलाएं ही सर्वोपरि हैं | फिर भी फाइव स्टार सभ्यता वाली महिलाओं को महिला दिवस की शुभ कामनाएँ | इन महिलाओं से निवेदन है की एक बार घर मे […]

कहानी

नीतू

नर से बढ़ कर नारी.  लिखा हमने पढ़ा.  सोचा हमने, समझा नहीं.  माना हमने, अपनाया नहीं.  लेकिन मैं एक उदाहरण लाई हूँ. सन 1995.  मेरे ससुर जी ने रिटायर्ड होने पर मुजफ्फरपुर(बिहार) में बना-बनाया घर खरीद लिया, जो हम लोगों का स्थाई निवास-स्थान बना.  उस घर के पड़ोस में ही एक परिवार रहता था.  उस […]

हाइकु/सेदोका

महिला दिवस हाइकु

1 माला की सूता संजोये दो दो ड्योढीं सेतु है सुता । 2 घर गमले स्त्री-वट हो बोंजाई रिश्ते सम्भले। 3 बिहँसे हिय छूती शिखर सुता नैन में भय। 4 चक्की जोहती खनकती चूड़ियाँ दाल दरती । 5 डूबाती ठाँव देहली जाती लाँघ मिटाती छाँव। 6 जीव सींचती स्थितप्रज्ञ स्त्री धारा अंक भींचती । रागी […]

संस्मरण

मेरी कहानी – 6

लूट मार के बाद गाँव में कुछ दिन शांत रहे, लेकिन अब और अजीब बातें  सुनने को मिलने लगीं। लोग बातें कर रहे थे कि पाकिस्तान से एक गाड़ी आई थी  जो हिन्दू और सिखों की लाशों से भरी हुई थी। यह भी बोल रहे थे कि हिन्दू सिखों के घरों को लूट कर उन की लड़किओं […]

कविता

वादा

वो चले जाते हैं फिर लोट के आने का वादा करके मगर हम हैं की हटते ही नही न जाने का इरादा करके कोई सम्झादे उन्हें की रत्ती भर भर भी सब्र नही हममे जिन्दा हैं तो सिर्फ उनके साथ अपनी हर ख़ुशी और हर गम साँझा करके माना की हम करते हैं बदतमीज़ीआं क्योंकि […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मिले थे दिल जहाँ दिल से वहीँ इक बार आ जाना, मुहब्बत कितनी है हम से कसम तुमको बता जाना| रही मजबूरियां होंगी वफ़ा हम कर नहीं पाए, निभाया हमने हर रिश्ता सदा ही बा वफ़ा जाना | तुम्हारे हाथ की छूअन अभी तक हाथ में जिन्दा, कि फिर इन हाथों में मेरे तू अपना […]

मुक्तक/दोहा

बधाई

आपस में आप सभी मित्र जन होली मनाई, प्रेम रूपी दिलभरे रंगों को एक में मिलाई, यही मैं ईश्वर से कर बद्ध प्रार्थना करता हूँ, सभी मित्र अपने-अपने घर खुशियाँ मनाई। •