कविता

अधरों की रानी (कविता)

मैं बांसुरी हूं, इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक वे जो ‘सुरी’ के पहले, ‘बे’ उपसर्ग लगाकर, मुझे बेसुरी कहने से बाज़ नहीं आते हैं, वे मुझे महज बांस की पौरी मात्र समझते हैं, मुझमें पोल को देखते हैं और देखते हैं मेरे छेद, वे मेरी सूरत ही देखते हैं पर, […]

कविता

प्यार ही धरोहर है

प्यार अमूल्य धरोहर है इसकी अनुभूति किसी योग साधना से कम नहीं है, इसके रूप अनेक हैं लेकिन नाम एक है। प्यार रिश्तों की धरोहर है और इस धरोहर को बनाये रखना हमारी संस्कृति एकता और अखंडता है , यह अनमोल है। प्यार निर्झर झरनों की तरह हमारे दिलों में बहता रहे यही जीवन की […]

कविता

प्रेम क्या है

प्रेम कोई प्रर्दशन नहीं है, प्रेम झूठी उपासना नहीं है, प्रेम अतृप्त वासना नहीं है, प्रेम कोई दिखावा नहीं है। प्रेम श्रृंगार भी नहीं है, प्रेम ना ही सत्कार है, प्रेम कोई परीक्षा भी नहीं, प्रेम कोई समझौता भी नहीं। प्रेम कोई झूठे स्वप्न नहीं दिखाता, प्रेम मोह जाल में भी नहीं फंसाता, प्रेम में […]

पुस्तक समीक्षा

“उत्तर – पूर्वी भारत के आदिवासी” पुस्तक

मेरी पुस्तक “उत्तर – पूर्वी भारत के आदिवासी” प्रकाशित हो चुकी है I यह अमेज़न पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है I पुस्तक की विषय सूची इस प्रकार है: 1.परिचय : भूमि और लोग – पूर्वोत्तर भारत का परिचयात्मक वर्णन, बंगलादेशी घुसपैठ, पूर्वोत्तर की पौराणिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पूर्वोत्तर के पर्यटन स्थल, पूर्वोत्तर की भाषाएँ, धर्म, […]

गीत/नवगीत

देश विरोधी नहीं बनो

निकले हैं जो सड़कों पर अपने हथकंडे लेकर देश जलाने निकले हैं जो नारे और झंडे लेकर उनसे कह दो भारत में ये दहशतगर्दी ठीक नहीं राम-कृष्ण की धरती पर ये गुंडागर्दी ठीक नहीं लोकतंत्र में धरनों का मान सदा ही ऊंचा है नीतिगत-दलगत विरोध का स्थान सदा ही ऊंचा है यह शांत-सौम्य-शालीन धरा परिवेश […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूँज – 13 : पंछियों की वापसी और एक याद

         मार्च आ गया है। ठण्ड बहुत पडी है और तूफ़ान भी एक के बाद एक अलग अलग नाम धरकर आये हैं।  तूफानों को इंसानों के नाम देना मौसम विभाग की परम्परा है। अभी डेनिस नामक तूफ़ान ख़तम नहीं हुआ है। हवा तेज है और उसमे बर्फानी खुनक है।  मगर फूल अपनी […]

कहानी

कहानी – जीना ही पडेगा

ज़िन्दगी गुजर ही जाती है पर अभी रश्मि को समझ नहीं आ रहा था कि जीवन का ये अंधेरा कैसे कटेगा?…कैसी सुबह -शाम होगी?  सब कुछ अचानक ही घटित हुआ था। कभी उसने सपने मे भी नहीं सोचा था कि सुमित उसे बीच मझधार दो मासूम बच्चियों के साथ छोड़कर दुनिया से चला जायेगा। अभी […]

संस्मरण

माँ से कम नहीं

बाल दिवस 2003 – पत्नी का असामयिक निधन  – इकलौती सन्तान 17 वर्षीया बेटी के लिए मम्मी की भी भूमिका निभाने का दायित्व  – परमाणु वैज्ञानिक की जिम्मेदारी  – अशक्त अम्मा की भी देखभाल करना  – कुछ समय के लिए अम्मा की सेवा हेतु बहन का सहारा मिला  – पर युवा होती बेटी को आत्मनिर्भर […]

गीत/नवगीत

रंगे सियारों की टोली

सूरत बदली, सीरत बदली, बदल गयी है बोली चौराहों पर रंगे सियारों की, जब निकली टोली। बने चोर मौसेरे भाई, दुश्मन थे जो पुराने बिन मौसम दादुर के वंशज, निकल पड़े टर्राने देते हैं ना साथ वतन का, आज बने हमजोली सूरत बदली, सीरत बदली, बदल गयी है बोली।1। रंग बदल कर गिरगिट दुबके, बांबी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आँख से बहती नदी है, क्या अज़ब दीवानगी है। चार दिन की दोस्ती है, चार दिन की ज़िन्दगी है। भूलना मुमकिन नहीं है, याद भी जाती नहीं है। ख़्वाब भी टूटे पड़े हैं, आस भी गिरवी पड़ी है। मैं बुरा हूँ मानता हूँ, आपमें भी कुछ कमी है। प्यार है तो सोचना क्या, क्या गलत […]