गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

“गीतिका” नदियों में वो धार कहाँ से लाऊँ राधा जैसा प्यार कहाँ से लाऊँ कैसे कैसे मिलती मन की मंजिल आँगन में परिवार कहाँ से लाऊँ।। सबका घर है मंदिर कहते सारे मंदिर में करतार कहाँ से लाऊँ।। छूना है आकाश सभी को पल में चेतक सी रफ्तार कहाँ से लाऊँ।। सपने सुंदर आँखों में […]

कविता

दोहा

तेरे बहिष्कार का आगाज़ भारत की जनता व सरकार दोनों ने कर दिया है रे पापी चीन, अब तेरा क्या होगा कालिया…….धाँय धाँय धाँय…….? “दोहा” उतर गया तू नजर से, औने बौने चीन। फेंक दिया भारत तुझे, जैसे खाली टीन।। नजर नहीं तेरी सही, घटिया तेरा माल। सुन ले ड्रेगन कान से, बिगड़ी तेरी चाल।। […]

कविता

कुंडलिया

“कुंडलिया” मधुवन में हैं गोपियाँ, गोकुल वाले श्याम। रास रचाने के लिए, है बरसाने ग्राम।। है बरसाने ग्राम, नाम राधिका कुमारी। डाल कदम की डाल, झूलती झूला प्यारी।। कह गौतम कविराय, बजा दो वंशी उपवन। गोवर्धन गिरिराज, आज फिर आओ मधुवन।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

कविता

कुंडलिया

“कुंडलिया” बचपन में पकड़े बहुत, सबने तोताराम किये हवाले पिंजरे, बंद किए खग आम बंद किए खग आम, चपल मन खुशी मिली थी कैसी थी वह शाम, चाँदनी रात खिली थी कह गौतम कविराय, न कर नादानी पचपन हो जा घर में बंद, बहुरि कब आए बचपन।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

सुनते रहिये गीत गायकी अपने अपने घर में। धोते रहिए हाथ हमेशा साबुन अपने घर में। आना जाना छोड़ कहीं भी धीरज के संग रहिए- पानी गरम गला तर रखिए हँसिए अपने घर में।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म सामाजिक

सतरंगी समाचार कुञ्ज-26

(अनोखे विवाह विशेष कड़ी) आप लोग जानते ही हैं, कि ‘सतरंगी समाचार कुञ्ज’ में सात रंगों के समाचार हम लिखते हैं, शेष रंगों के समाचार कामेंट्स में आपकी-हमारी लेखनी से लिखे जाएंगे. आइए देखते हैं इस कड़ी के सात रंग के समाचार, इससे पहले इस कड़ी के बारे में एक जरूरी बात. इस कड़ी के […]

मुक्तक/दोहा

अब

स्वार्थ, छल के पाश में जकड़े हुए हैं लोग अब अपने – अपने दंभ में , अकडे़ हुए हैं लोग अब चल पडे़ हैं लोग सारे, राह सच की छोड़कर के झूठ की ही राह को , पकडे़ हुए हैं लोग अब   तथ्य ये साबित हुआ , जब हो गए प्रयोग सारे आधुनिकताओं में […]

लघुकथा

समर्पण

कितनी शांत होकर सो रही है सुरभि, आज उठने का नाम भी नही ले रही ,जितना झंझोड़ता हूँ उतनी ही शांत दिखती है । जब कभी भी हमारी बहस होती और मैं रूठ जाया करता था ,तब कहती थी मुझसे ,”अब रूठा न करो ,मुझसे बर्दाश्त नहीं होता, बुढ़ापा आ रहा है ;यदि कभी मैं […]

कविता

इतिहास रचो तुम

नारी तुम माँ हो, बहिन हो, पत्नी हो, बेटी हो, कई अलग रूपों से गुजर कर भी तुम्हे किसने अबला बना दिया ? कन्या का पूजन करवा कर भी तुम्हें कई बार गोद में ही मरवा दिया। हुस्न की जाल में तुम्हारी अस्मत को भी लूट लिया। आदमी ने मकान बनाया औरत ने उसे घर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़िन्दगी इतनी उदास क्यूं है भटकती हुई-सी आस क्यूं है । सब कुछ है दिखावटी,नकली, खोखला इस कदर हास क्यूं है । दूर-दूर तक है फैली खामोशी, ग़मगीन हर दिवस,मास क्यूं है । शंका के बादल छाये गगन पर, सिसकता यहां विश्वास क्यूं है । कितने हैं ज़िन्दा,कहना कठिन, चलती-फिरती हर लाश क्यूं है । […]