कविता कुण्डली/छंद

अहीर छंद “प्रदूषण”

अहीर छंद “प्रदूषण” बढ़ा प्रदूषण जोर। इसका कहीं न छोर।। संकट ये अति घोर। मचा चतुर्दिक शोर।। यह दावानल आग। हम सब पर यह दाग।। जाओ मानव जाग। छोड़ो भागमभाग।। मनुज दनुज सम होय। मर्यादा वह खोय।। स्वारथ का बन भृत्य। करे असुर सम कृत्य।। जंगल करत विनष्ट। सहे जीव-जग कष्ट।। प्राणी सकल कराह। भरते […]