गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लगता है ज़िन्दगी से वह ऊब गया तभी तो मेरी मोहब्बत में डूब गया औरों से अलग था हर अन्दाज़ मेरा सब उत्तर की ओर तो मैं जनूब गया जीने की ज़िद में मरता नहीं है हौसला न जाने कितनी बार मसला दूब गया इश्क़ में भुला दिया था जिसने खुद को सुना है कि […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आशिक़ी हूं मैं किसी और की कह गई छत से पहले ही दीवार ढह गई जब से सुलझाया उसके गेसुओं को ज़िंदगी मेरी उलझ कर रह गई जो रहती नहीं थी कभी मेरे बग़ैर वो किसी और का बन कर रह गई बसाया था जिसे मैंने अपनी आंखों में वो बेवफा आंसुओं के संग बह […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लो कहता हूं जो कहा नहीं धड़कनों में मेरी हो तुम्हीं चलो बसाएं एक दुनिया इस दुनिया से दूर कहीं कर सके न जुदा कोई हमें अब रहना वहीं तुमसे है वजूद मेरा तुम नहीं तो मैं नहीं ✍️ आलोक कौशिक 

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हुई भूल जो समझा उन्हें शाइस्ता जाती है अब जान आहिस्ता-आहिस्ता करना ना मोहब्बत कभी बेक़दरों से ऐ दिलवालों तुझे वफ़ा का है वास्ता मंज़िल तो मिलती नहीं ऐसे राही को तक़लीफ़ों में ही गुज़रता है रास्ता खंडहर बन चुका है अब ये दिल जो हुआ करता था महल आरास्ता ✍️ आलोक कौशिक

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आग नहीं हूं मैं कुछ लोग फिर भी जलते हैं मुझको गिराने में वो हर बार फिसलते हैं उनसे भी मिला करो जिनकी ज़ुबां है कड़वी बचो उनसे जो कानों में ज़हर उगलते हैं देती है सुकून आख़िर मेरी ही मोहब्बत आज भी दिल जब हसीनाओं के मचलते हैं अश्कों का सैलाब उमड़ पड़ता है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सारे शहर में चर्चा ये सरेआम हो गया दोस्ती से ऊपर हिंदू इस्लाम हो गया खड़ी कर दी मज़हब की दीवार तो सुन अब भगवान मेरा परशुराम हो गया गिरे हो तुम जबसे मेरी इन नज़रों में तेरी नज़रों में काफ़िर मेरा नाम हो गया कामयाबी मिल सकती थी तुझको लेकिन नापाक था साजिश तेरा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुद को तुम समझाकर तो देखो दर्द में भी मुस्कुराकर तो देखो जरूरतें हो जाएंगी कम तेरी भी ईमानदारी से कमाकर तो देखो बढ़ जाएगा एक और दुश्मन किसी को आईना दिखाकर तो देखो सीख जाओगे दलाली भी करना तुम पत्रकार बनकर तो देखो हो जाएगी मोहब्बत मिट्टी से कुल्हड़ में चाय पीकर तो देखो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेबसी की आख़िरी रात कभी तो होगी रहमतों की बरसात कभी तो होगी जो खो गया था कभी राह-ए-सफ़र में उस राही से मुलाक़ात कभी तो होगी हो मुझ पर निगाह-ए-करम तेरी इबादत में ऐसी बात कभी तो होगी आऊंगा तेरी चौखट पे मेरे मालिक मेरे कदमों की बिसात कभी तो होगी लगेगा ना दिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मानव ही मानवता को शर्मसार करता है सांप डसने से क्या कभी इंकार करता है उसको भी सज़ा दो गुनहगार तो वह भी है जो ज़ुबां और आंखों से बलात्कार करता है तू ग़ैर है मत देख मेरी बर्बादी के सपने ऐसा काम सिर्फ़ मेरा रिश्तेदार करता है देखकर जो नज़रें चुराता था कल तलक […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

यह दावा है मेरा मैं तुझे याद आता रहूंगा हवा बनकर सांसों में तेरी समाता रहूंगा तेरी रूह भी हो जाये बेचैन सुनकर जिसे लिखकर ग़ज़लें ऐसी मैं अब गाता रहूंगा सो भी ना सकोगे सुकूं से बिछड़कर मुझसे यादों से अपनी ऐसे मैं तुझे जगाता रहूंगा ख़ैरियत तक पूछेंगे लोग मेरी तुझसे ही एक […]