कविता

कलयुग का भारत

कलयुग के भारत की हैं बात निराली ईमानदारी यहाँ कुछ ने ही जानी। माँ-बाप की कुछ लोग कद्र नहीं करते औरतों का भी सम्मान नहीं करते। काट दिया इंसान ने इंसान को बेच दिया अपने ही जहान को। शराब की लत में डुबा यहां का इंसान हैं बेच रहा अपना ही घर-बार है। बेटियों को […]