कविता

पैरों में लगी महावर आज

बसंत भी आ धमका, दल  बल  के   साथ। सुरभित  पवन    भी , दे रहा उसका साथ।। अवनि आज पीत बसना, मुदित हो रही साथ साथ । टेसू   उत्सुक  दिखें आज, केसरिया झंडा लिए हाथ।। घर  घर   में  उत्सव  दूना, बन  रहीं   रंगोली  आज। युवतियां दिखें पीत बसना, पैरों में लगी महावर आज।। –अशर्फी लाल […]

कविता

कोहरे की अब दादागीरी

लगा माघ शीत अति भारी, कैसे बिताऊँ ठंढ अनियारी। हाड़   कांपै   अग्नी   सीरी, कोहरे  की  अब  दादागीरी। शीत    मीत    पवन   देव, निकल  पड़े  हैं  धीरे  धीरे। अवसर देख मेघ आ धमके, बूंदे   झरती     धीरे    धीरे। दिन रात में नाहीं कोई अंतर, दिनकर   मानो   छू   मंतर। –अशर्फी लाल मिश्र 

कविता

मीराबाई

भक्तों में सिरमौर है मीरा, सन्तों में सिरमौर है मीरा। कवियों में सिरमौर है मीरा, भारत की पहचान है मीरा।। कुड़की गाँव में जन्मी वह , जोधा की पड़पोती थी। राठौड़ वंश में जन्मी मीरा, भारत की है शान मीरा।। रत्न सिंह की पुत्री थी , भोजराज की पत्नी । बचपन से दृढ़ निश्चयी मीरा, […]

कविता

हे! नववर्ष

हे! नववर्ष क्या साथ लाए हो अपने? ढ़ेरों खुशियाँ उपहार, उमंग, अच्छाइयाँ, गर नहीं तो मैं नहीं कहूँगा नववर्ष न ही करुँगा स्वागत बेवजह ही मैं बस पढ़ता रहूँगा पुराने वर्ष की अथक कथाएँ कई महीनों तक आज की कल की पल पल की| अशोक बाबू माहौर

कविता पद्य साहित्य

ऊषा सुन्दरी

रजनी   साथ   रहे   उडगन। न अब रजनी न अब उडगन।। बीती विभावरी छाई मुस्कान। खग कुल  की है  मीठी तान।। प्राची   दिशि   खड़ी  सुन्दरी। लाल   बिंदी    सोहै    भाल।। एक    टक   वह   खड़ी हुई। लालीमय     जिसके   गाल।। लाल   चूनर   शोभित   तन। हाथ  जिसके सजा है थाल।। स्वागत करने अपने प्रिय का। ऊषा […]

कविता

प्रताप का भाला

राणा ने खाई घास की रोटियाँ, शैया जिनकी कंकड़ पर। अरावली की पहाड़ियाँ भी, राणा संग हो गई अमर।। अकबर सेना बहुत विशाल, प्रताप सेना पहुँची समर। देखि  चेतक चाल जबै, भगदड़ मच गई बीच समर।। चेतक ने अब पैर रखे, मान सिंह के हाथी पर। भय से हौदा हिल गया, गिरते गिरते भूमि पर।। […]

कविता

जलियांवाला बाग

अपनी सत्ता बचाने को, विद्रोह का डर मिटाने को, उठती आवाजें दबाने को हुआ था जलियांवाला बाग। कोई न बच सका था जो भी था उस मैदान में। कोई न सोच सका था कि यह भी होगा अंग्रेजी राज में। मर्द हो, औरत हो या नवजात हो किसी को नहीं बख्शा था ‘डायर’ ने इंसानियत […]

कविता

राम राज्य

राम राज्य चाहिए सबको पर राम नहीं बनना किसी को। सुखी संसार चाहिए सबको पर दूसरों को सुख नहीं देना किसी को। राम राज्य चाहिए अगर तुमको तो पहले राम जैसे तुम बनो अपने अंदर उनका एक गुण तो धरो। राम राज्य चाहिए अगर तो राम तुम्हें बनना होगा। उनके गुणों को धारण करना होगा। […]

कविता

कल और कल

सीचें पानी, न करें इंतज़ार बरसात की न करें चिंता बरसात की बगैर करें चिंता खुशकी – ए – पंखुड़ी की कैसे करें उम्मीद अनदेखे कल की न करें पछतावा बीते हुए कल की। सीचें पानी, न करें इंतज़ार बरसात की — वत्सला सौम्या समरकोन

कविता

बारिश की बौछार

बारिश की बौछार बारिश की बूंदे जब धरती से मिल जाती हैं तवे सी गर्म धरती पर तब सुकून की बौछार हो जाती हैं। सूखे पत्तों में भी हरियाली सी छा जाती है। लहर उठे खेत खलिहान भी इस बारिश की बौछार से। स्वागत करते मोर भी फैलाकर पंख और नाच से। मेंढक भी टरटर […]