कहानी

कहानी- गलतफहमियां

एक महोदय पार्टी में सीना चौड़ाकर कर बोल रहे थे कि मेरा बेटा मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है। पास में खड़े अन्य लोग उनकी बातों को सुन रहे थे, तभी एक दूसरे व्यक्ति ने किसी से पूछा कि शर्मा जी आपका बेटा भी तो किसी कंपनी में काम करता है? शर्मा जी ने जवाब […]

कहानी

सदमा

दो महीने हो गये। शांति देवी की हालत में कुछ भी सुधार ना हुआ। पुरुषोत्तम बाबू को उनके मित्रों और रिश्तेदारों ने सुझाव दिया कि एक बार अपनी पत्नी को मनोचिकित्सक से दिखवा लें। पुरुषोत्तम बाबू को सुझाव सही लगा। अगले ही दिन अपने बड़े पुत्र सौरभ एवं पुत्रवधू संध्या के साथ अपनी पत्नी को […]

कहानी

रोटियाँ

“चाची,रोटी क्या इतनी भी गोल हो सकती है,मानो कि पूनम का चाँद हो जैसे और वो भी बिना किसी दाग के। अगर तुम ऐसी ही रोटियाँ मुझे खिलाती रही तो मैं तो पूरे महीने का राशन एक दिन में खा जाऊँगा।” कौशल चाची की तारीफ करते-करते न जाने कितनी रोटियाँ खा चुका था। चाची बोली […]

कहानी

कहानी- रात में जागती आँखें

रात को बच्चे वह देख लेते हैं जो उन्हें नहीं देखना चाहिए ! सोनल यानी चिंटू अब 5 साल का हो गया था , बच्चे आज कल अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते हैं इसलिए पहली कक्षा में वह 5 साल के पहले नहीं आ पाते . आजकल बच्चे वैसे भी बहुत होशियार पैदा हो रहे हैं […]

लघुकथा

हसरत

विमला ने पैसे एक प्लास्टिक की डिब्बी में रख भगवान के सामने रख दिए. हाथ जोड़ कर उसने मन ही मन ईश्वर का धन्यवाद किया. अब उसका बेटा स्कूल जा सकेगा. उसकी हसरत थी कि उसका बेटा पढ़ लिख कर कुछ बने. डरती थी कि यदि उसे स्कूल नही भेज सकी तो बस्ती के बुरे […]

लघुकथा

बिछोह

आज राजेंद्र बाबू का पछत्तरवां जन्मदिन था. पोती ने बर्थडे का केक डाइनिंग टेबल पर सजा दिया था. इंतज़ार था तो उनके मित्र अरोड़ा जी का. उनके आते ही केक काटा जाना था. आज सुबह से ही राजेंद्र बाबू बीते जीवन को याद कर रहे थे. कई भूले बिसरे चेहरे मानस पटल पर उभर रहे […]

कहानी

नींव

नीता का पारा चढ़ा हुआ था. विवेक नीता की नाराज़गी समझ रहा था. उसे मनाते हुए बोला “अब अपना मूड खराब मत करो. हंसो बोलो.” नीता ने घूर कर देखा फिर गुस्से से बोली “मुझे दो चेहरे रखने नही आते हैं. मेरा मूड खराब है और वह दिखेगा भी.” “मूड खराब कर क्या मिलेगा.” धीरे […]

लघुकथा

सेंटा क्लॉज़

बंटी को पूरा विश्वास था कि इस क्रिसमस पर सेंटा क्लॉज़ उसके लिए उपहार अवश्य छोड़ कर जाएंगे. इस बार वह अच्छा बच्चा बन कर रहा है. समय पर अपना होमवर्क करता था. मम्मी पापा की सारी बात मानता था. दादाजी को रोज़ उनकी दवाइयां लेने में सहायता करता था. वह पूरी कोशिश कर रहा […]

लघुकथा

राह

सौम्य के मित्रों रिश्तेदारों और बड़े से सर्किल में जिसने भी सुना वह चौंक गया. सभी केवल एक ही बात कह रहे थे ‘भला यह भी कोई निर्णय हैं.’ सबसे अधिक दुखी और नाराज़ उसकी माँ थीं. होतीं भी क्यों नही. पति की मृत्यु के बाद कितनी तकलीफें सह कर उसे बड़ा किया था. “इसे निरा पागलपन […]

लघुकथा

खोखली व्यवस्था

स्थानांतरण पर जब निखिल अपने शहर वापस आया तो अपने बेटे कमल के दाखिले के लिए अपने पुराने स्कूल का चुनाव किया. छात्रों को संस्कार, मर्यादा एवं अनुशासन का पाठ पढ़ाना ही स्कूल का प्रमुख लक्ष्य था. शिक्षक छात्रों के विकास पर उसी प्रकार ध्यान देते थे जैसे माता पिता देते हैं. यही कारण था […]