गीत/नवगीत

मेघ जीवन

“मेघ जीवन” किरणों की मथनी से सूरज, मथता जब सागर जल को । नवनीत मेघ तब ऊपर आता, नवजीवन देने भूतल को । था कतरा कतरा सा पहले, धुनी तूल सा पूर्ण धवल । घनीभूत जुड़ जुड़ के हुआ तो, धरा काली घटा का रूप प्रबल । दमका तड़ित प्रचंड महा, चला चीर अम्बर के […]