कविता पद्य साहित्य

भारत वर्ष: राष्ट्रीय एकता दिवस

कल दशहरा मनाया था, आज ईद मनाएँगे; कल खीर खिलाई थी, आज सिवाईयाँ खिलाएँगे; कभी गुरुपर्व, कभी क्रिसमस की बधाई देने आएँगे; सारे त्यौहार मिलजुल कर मने, तभी तो सच्चे हिंदुस्तानी कहलाएंगे!   वेदों की ऋचाओं सा हो हमारा विश्वास, कुरान की आयतों सी हो हर आस, गुरबानी हो या प्रेयर, या हो महारास, किस […]

कविता

कलयुग का भारत

कलयुग के भारत की हैं बात निराली ईमानदारी यहाँ कुछ ने ही जानी। माँ-बाप की कुछ लोग कद्र नहीं करते औरतों का भी सम्मान नहीं करते। काट दिया इंसान ने इंसान को बेच दिया अपने ही जहान को। शराब की लत में डुबा यहां का इंसान हैं बेच रहा अपना ही घर-बार है। बेटियों को […]