मुक्तक/दोहा

मुक्तक (सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं)

रोता नहीं है कोई भी किसी और के लिए सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं प्यार की दौलत को कभी छोटा न समझना तुम होते है बदनसीब वे जो पाकर इसे खोते हैं मुक्तक (सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं) मदन मोहन सक्सेना

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल ( क्या जज्बात की कीमत चंद महीने के लिए है )

दर्द को अपने से कभी रुखसत ना कीजिये क्योंकि दर्द का सहारा तो जीने के लिए है पी करके मर्जे इश्क़ में बहका ना कीजिये ख़ामोशी की मदिरा तो सिर्फ पीने के लिए है फूल से अलगाब की खुशबु ना लीजिये क्या प्यार की चर्चा केबल मदीने के लिए है टूटे हैं दिल , टूटा […]

कविता

अर्थ का अनर्थ (अब तो आ कान्हा जाओ)

कृष्ण जन्माष्टमी बिशेष अब तो आ कान्हा जाओ, इस धरती पर सब त्रस्त हुए दुःख सहने को भक्त तुम्हारे आज सभी अभिशप्त हुए नन्द दुलारे कृष्ण कन्हैया ,अब भक्त पुकारे आ जाओ प्रभु दुष्टों का संहार करो और प्यार सिखाने आ जाओ अर्थ का अनर्थ एक रोज हम यूँ ही बृन्दावन गये भगबान कृष्ण हमें […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : समय से कौन जीता है समय ने खेल खेले हैं

अपनी जिंदगी गुजारी है ख्बाबों के ही साये में ख्बाबों में तो अरमानों के जाने कितने मेले हैं भुला पायेंगें कैसे हम, जिनके प्यार की खातिर सूरज चाँद की माफिक हम दुनिया में अकेले हैं महकता है जहाँ सारा मुहब्बत की बदौलत ही मुहब्बत को निभाने में फिर क्यों सारे झमेले हैं ये उसकी बदनसीबी […]

लेख

राखी रक्षा बंधन और रिश्तें

राखी का त्यौहार आ ही गया ,इस त्यौहार को मनाने के लिए या कहिये की मुनाफा कमाने के लिए समाज के सभी बर्गों ने कमर कस ली है। हिन्दुस्थान में राखी की परम्परा काफी पुरानी है . बदले दौर में जब सभी मूल्यों का हास हो रहा हो तो भला राखी का त्यौहार इससे अछुता […]

कविता

जय हिंदी जय हिंदुस्तान मेरा भारत बने महान

गंगा यमुना सी नदियाँ हैं जो देश का मन बढ़ाती हैं सीता सावित्री सी देवी जो आज भी पूजी जाती हैं यहाँ जाति धर्म का भेद नहीं सब मिलजुल करके रहतें हैं गाँधी सुभाष टैगोर तिलक नेहरु का भारत कहतें हैं यहाँ नाम का कोई जिक्र नहीं बस काम ही देखा जाता है जिसने जब […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : गज़ब हैं रंग जीबन के

गज़ब हैं रंग जीबन के गजब किस्से लगा करते जबानी जब कदम चूमे बचपन छूट जाता है बंगला ,कार, ओहदे को पाने के ही चक्कर में सीधा सच्चा बच्चों का आचरण छूट जाता है जबानी के नशे में लोग क्या क्या ना किया करते ढलते ही जबानी के बुढ़ापा टूट जाता है समय के साथ […]

लेख

आ गया राखी का पर्ब

आ गया राखी का पर्ब राखी का त्यौहार आ ही गया ,इस त्यौहार को मनाने के लिए या कहिये की मुनाफा कमाने के लिए समाज के सभी बर्गों ने कमर कस ली है। हिन्दुस्थान में राखी की परम्परा काफी पुरानी है . बदले दौर में जब सभी मूल्यों का हास हो रहा हो तो भला […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत

सजा क्या खूब मिलती है किसी से दिल लगाने की तन्हाई की महफ़िल में आदत हो गयी गाने की हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत तमन्ना अपनी रहती है खुद को भूल जाने की उम्मीदों का काजल जब से आँखों में लगाया है कोशिश पूरी होती है पत्थर से प्यार पाने की […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : निगाहों में बसी सूरत

कुछ इस तरह से हमने अपनी जिंदगी गुजारी है जीने की तमन्ना है न मौत हमको प्यारी है लाचारी का दामन आज हमने थाम रक्खा है उनसे किस तरह कह दें की उनकी सूरत प्यारी है निगाहों में बसी सूरत फिर उनको क्यों तलाशे है ना जाने ऐसा क्यों होता और कैसी बेकरारी है बादल […]