कविता

रूठी कलम

आज कोरे कागज पर, इन्सानों की अच्छाई पर, लिखने की इच्छा हुई। कागज सहम- सा गया और कलम भी थम- सी गई।। किसी कचड़े के डब्बे में, हमें फेंक देना, लेकिन हैवानों को इंसानों, का नाम ना देना।। थक गई हूं हर रोज़ निर्भया की , कहानी लिख- लिख कर। थक गई हूं निर्मम हत्याओं […]