कविता

म्हारा बचपन

  स्कूल की तख्ती अर काली स्याही की दवात आखर था वो बैट-गिण्डी का खैलणा चलौ बताऊँ थामनै म्हारै बचपन की बात कुश्ती आलै जोर होया करदै सबैरे उठ की खूब भाज्या करदै कुड़तै पजामै कै जिब ठाठ थै बाजै आगै चौकड़ी पै नाच्या करदै पींग घाल्या करदै रूखां पै तो बस करड़ी गांठ दैख्या […]