हाइकु/सेदोका

ये बालक कैसा? (हाइकु विधा)

ये बालक कैसा? (हाइकु विधा) अस्थिपिंजर कफ़न में लिपटा एक ठूँठ सा। पूर्ण उपेक्ष्य मानवी जीवन का कटु घूँट सा। स्लेटी बदन उसपे भाग्य लिखे मैलों की धार। कटोरा लिए एक मूर्त ढो रही तन का भार। लाल लोचन अपलक ताकते राहगीर को। सूखे से होंठ पपड़ी में छिपाए हर पीर को। उलझी लटें बरगद […]

कविता

हायकू

हायकू ============ हे खल तेरा करेंअभिनन्दन सत्य असत्य । =========== चली संग मे प्रियतम के घर पीहर छोड़। =============== सखी सावन विरहण वेदना बरसे आँसू। ================ आँगन बेटी ससुराल दुलारी आँगन न्यारी। ================ बरसे बूँद प्रिया ह्रदय मन दूर साजन। ============== राजकिशोर मिश्र ‘राज’ [03/11/2015में रचित]

हाइकु/सेदोका

दीपावली-हाइकु

1.चिराग जला दीपावली की रात उजाला फैला 2.कहाँ उजाला झोंपड़ी के बाहर घना अँधेरा 3. प्रकाश आओ गरीबों की दीवाली जगमगाओ 4. लक्ष्मी चंचला धन के लोभ में क्यों दीपक जला 5. अर्थ की खाई अनर्थ अंधकार तम धिक्कार 6. मन में ज्ञान हृदय में रोशनी लक्ष्य में ध्यान 7. इस दीवाली बोये प्रेम के […]

हाइकु/सेदोका

हायकू

आया वसंत नहि घर पे कन्त कैसा वसंत ? देखि वसंत पतझड़ का अंत दिक दिगन्त हर्षित जग करते कलरव नभ विहंग खिला सुमन देखि मुदित मन बिहसे जन वसंत लाया फूलो ने महकाया कंचन काया — राजकिशोर मिश्र ‘राज’

हाइकु/सेदोका

हायकू

हायकू [१] हे प्रियतम आषाढ़ बरसत वेदना देत / [२] ज्येष्ठ उमस, तन मन झुलसे , विरहण सी  / [३] अमराई मे शृंगार करे नित कूके कोयल / [४] नैन आकुल प्रियतम सनेह कंपित गात/ [५] विरहन के अंगार सेज मन ये कैसी वर्षा ? राजकिशोर मिश्र राज 22/06/2015