कविता

जो पास है

जो पास है वो सिर्फ आज है भूत भविष्य तो बस मन का एक ख़्वाब हैं। आज मे ही जीना है तुम्हें कुछ और नहीं सोचना है तुम्हें। अभी के इस पल को जी भर के तुम जी लो। भूत भविष्य की चिंता को अब तुम्हें हैं छोडना। बाद में वरना तुम पछताओगे जब कुछ […]

कविता

हिंदी भाषा को नमन

शीतल व सुन्दर स्वरूप, कुछ ऐसा है उसका प्रारूप प्रिय है वो सबकी, साधारण मनुज हो या भूप साहित्य और रचनाओं का संगम, नवीन और प्राचीन का समागम! भावों से भरपूर, रसों से सम्पूर्ण, कर्णों के लिए जैसे सुरीली सरगम! सब मंत्र मुग्ध हो जाते सुनके, आता  परम आनन्द! केवल प्रयोग मात्र से, ये अभिव्यक्ति, […]

कविता

सौगंध

नहीं जानती तुम मां भारती मैं तुमको कितना चाहता हूँ इसीलिए तुम्हारी रक्षा की सौगंध आज मैं खाता हूँ। आँच नहीं आने दूंगा मैं तुम्हारी आन-बान और शान पर मै। लड़ता जाऊंगा तुम्हारी खातिर अपनी आखिरी सांस तक मैं। मां का आचल , बहन की राखी रोक नहीं पाएगी मुझे तुम्हारी रक्षा से। क्योंकि वादा […]

कविता पद्य साहित्य

हिदुस्तानी है हिंदी

आओ बच्चों तुम्हे पढ़ायें, सच्चे जीवन की बातें पढ़ते जाओ लिखते जाओ, पढ़कर ही आगे जाते | भारत गौरव गाथा गाओ, मिलकर नन्हे सब बच्चे लय में मिठास कोयल जैसा, दिलों में भावना सच्चे || देवनागरी लिपि में हिन्दी, भाषा है अपनी प्यारी तुम जैसा लिखो वैसा पढो, विशेषता इसकी न्यारी | हँसते गाते सीखो […]