कविता

नारी की माया

धरती से लेकर अम्बर तक नारी की ही माया है देव दनुज मानव दानव सब नारी की ही छाया है जो भी भू पर आया उसको नारी ने ही जाया है सृष्टि के कण कण में होता नारी का ही साया है चीर हरण पर मौन साधकर नारी का अपमान किया उसी समय से कौरव […]

कविता

बँटवारा

आज़ादी का हाथ थाम कर आया बटँवारा इस देश में। तहस नहस कर दिया सबकुछ जिसनें पूरे देश में। मज़हब के नाम पर काटने लगा अचानक इंसान ही इंसान को। क्योंकि बट चुका था यह देश उसी के नाम पर हिंदू ,मुस्लिम, सिख, ईसाई जो पहले थे जिगरी भाई । पर अब चुके थे सब […]

कविता

व्यतीत करना छोड़ दें

व्यतीत करना छोड़ दें जीवन जीना अब तू सीख ले । अपने जीवन काल में तू कर गुज़र कुछ ऐसा कि हिमालय भी झुक पड़े और बोले कि तुझ-सा नहीं देखा।। आपनी इच्छाओं का तू गला कभी मत घोटना। क्या पता वही तुझे तेरी मंजिल तक पहुंचा दे। अब छोटी – छोटी बातों में हँसना […]

कविता

कलयुग का भारत

कलयुग के भारत की हैं बात निराली ईमानदारी यहाँ कुछ ने ही जानी। माँ-बाप की कुछ लोग कद्र नहीं करते औरतों का भी सम्मान नहीं करते। काट दिया इंसान ने इंसान को बेच दिया अपने ही जहान को। शराब की लत में डुबा यहां का इंसान हैं बेच रहा अपना ही घर-बार है। बेटियों को […]

कविता

एक आवाज़ पर्यावरण की

मुझ पर एक अहसान जताओ मुझ पर तुम कोई जुर्म न ढ़हाओ मेरे इस अस्तित्व को कृपया कर तुम ही बचाओ। मै नहीं तो तुम भी नहीं अपने लिए तो मुझे बचाओ। मेरे इन हाथों पर अपना दम मत दिखाओ। जब-जब मुझे गुस्सा दिलाओगे बाद में तुम पछताओगे। मैं था पहले कितना सुंदर तुमने मुझे […]

कविता

सियासी हिंदुस्तान

हर पल, हर घड़ी घुट-घुटकर जीते लोग यहाँ। सूखा, बाढ़, भुखमरी से हर साल जूझते लोग यहाँ। देश की बेटियों की सुरक्षा है बहुत बड़ा सवाल यहाँ। कर्ज़ के भारी बोझ तले दबे रहते किसान यहाँ। जातिवाद की चिंगारी से भड़क उठते लोग यहाँ। वीर जवानों की शहादत पर भी सवाल उठते रोज़ यहाँ। फिर […]

कविता

भारत माता दुखी हो गई

भारत माता दुखी हो गई सुनकर अपने बच्चों की वाणी। जो बोल रहे हैं रिश्वत जैसी गाली। भारत माँ भी कह उठी – “बच्चों ने किया ऐसा बुरा हाल कि मै हो रही हूँ बेहाल। मै थी पहले सोन चिड़इया नेता मुझे खा गए। अपनी भारत माँ के नाम पर करोड़ों को यह डकार गए।” […]

लघुकथा

डूबा हुआ शहर

दो दिनों से लगातार पानी बरस रहा था। चारों तरफ पानी ने त्राहि त्राहि मचा रखी थी। घर में पानी भर गया तो मरियम छत पर आकर मदद की राह देखने लगी। “हे प्रभू ये कैसी विपदा आ गई। मेहनत से संजोई हुई गृहस्ती बर्बाद हो गई। अब तो रहम करो।” तभी छत के ऊपर […]

लघुकथा

तसल्ली

नर्स ऑपरेशन से पहले कुछ दवाएं देने आई तो देखा कि मि. दत्त कुछ परेशान हैं। “घबराइए नहीं सर डॉ. खान माने हुए सर्जन हैं।” मि. दत्त को ऑपरेशन की चिंता नहीं थी। उनकी निगाहें दरवाज़े पर लगी थीं। तभी घर से कुछ आवश्यक सामान लेकर लौटी पत्नी के साथ ही उनके चेहरे पर मुस्कान […]

लघुकथा

आत्मिक सुख

विभूति बाबू के रिटायरमेंट को करीब छह महीने बीत गए थे। उनके कमरे में चारों तरफ साहित्यिक किताबें रखी थीं। वह कागज़ कलम लेकर कुछ लिख रहे थे। तभी उनके चचेरे भाई उनसे मिलने आए। “अभी तक तक कलम घिसने से जी नहीं भरा ?” अपने भाई के प्रश्न के जवाब में विभूति बाबू बोले। […]