पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

दुलारी होली

1. दे गया दग़ा रंगों का ये मौसम, मन है कोरा। 2. गुज़रा छू के कर अठखेलियाँ मौसमी-रंग। 3. होली आई मन ने दग़ा किया उसे भगाया। 4. दुलारी होली मेरे दुःख छुपाई देती बधाई। 5. सादा-सा मन होली से मिलकर बना रंगीला। 6. होलिका-दिन होलिका जल मरी कमाके पुण्य। 7. फगुआ मन जी में […]

कुण्डली/छंद पद्य साहित्य

मनहरण घनाक्षरी (होली के रंग)

मनहरण घनाक्षरी “होली के रंग” होली की मची है धूम, रहे होलियार झूम, मस्त है मलंग जैसे, डफली बजात है। हाथ उठा आँख मींच, जोगीड़ा की तान खींच, मुख से अजीब कोई, स्वाँग को बनात है। रंगों में हैं सराबोर, हुड़दंग पुरजोर, शिव के गणों की जैसे, निकली बरात है। ऊँच-नीच सारे त्याग, एक होय […]