कविता कुण्डली/छंद

32 मात्रिक छंद “जाग उठो हे वीर जवानों”

32 मात्रिक छंद “जाग उठो हे वीर जवानों” जाग उठो हे वीर जवानों, तुमने अब तक बहुत सहा है। त्यज दो आज नींद ये गहरी, देश तुम्हें ये बुला रहा है।। छोड़ो आलस का अब आँचल, अरि-ऐंठन का कर दो मर्दन। टूटो मृग झुंडों के ऊपर, गर्जन करते केहरि सम बन।।1।। संकट के घन उमड़ […]