भाषा-साहित्य

मेरा भाई

  कदै भी पड्या मैं तनै ठाया भाई हर एक जिम्मा तनै निभाया भाई मै तो जिब कसूता ऐ डरया करदा साईकल पै पहली तनै चलाया भाई मै तो कतई धूल तेरे स्नेह का फूल नूये खिलेगा सच बताऊँ तेरे बरगा भाई नहीं मिलेगा कदै तै दिलखोल कै जिणियां सै किसे तै बी कोनी डरदा […]

गीत/नवगीत

प्यार की राखी -गीत

प्यार की राखी लेकर बहना आई है भैया कलाई को अपनी बढ़ा दीजिए। रेशम के धागों में खुशियाँ  लाई  है। भैया कलाई को अपनी बढ़ा दीजिए। थाल पूजा की देखो तो है सज गई आरती की ज्योति भी है जल गई रोली का तिलक मैं लगाऊं भैया अब थोड़ा सा तो मुस्कुरा दीजिए प्यार की […]

कविता

है इश्क़ अग़र

है इश्क़ अगर तो जताना ही होगा दिलबर को पहले बताना ही होगा पसंद नापसंद की है परवाह कैसी तोहफ़े को पहले छुपाना ही होगा धड़कन हृदय की सुनाने की ख़ातिर उसको गले तो लगाना ही होगा आँखों ही आँखों में जब हों इशारे ओ पगली लटों को हटाना ही होगा छूकर तुम्हें अब है […]

कविता

बिस्तर ताले में बन्द हो गया

छोटा बेटा था मैं हाँ सबसे छोटा जिसके बालों की चाँदी को अनदेखा करके किसी ने बच्चा बनाए रखा था जिससे लाड़ था प्यार था दुलार था कि आदत जिसकी हो गई खराब थी कि अचानक अनचाही एक सुबह यूँ करके उठी कि मायने हर बात के बदल गए कि वो बच्चा आदमी सा बन […]

गीतिका/ग़ज़ल

तेरी ओर आना चाहूँ

तेरी ओर आना चाहूँ तेरी ओर आना चाहूँ, पर तूफ़ान हैं बहुत. मिलन के बीच में यहाँ, शैतान हैं बहुत. चलो दिलकशी का दौर है, हम भी ज़रा चख लें. बूढ़े हैं कम यहाँ, यहाँ जवान हैं बहुत. चलो फैला लो पंख पंछी, कब से निराश हो. हिम्मत तो करो फिर से के मैदान हैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

मेरी माँ ने

मेरी माँ ने झूठ बोल के आंसू छिपा लिया भूखी रह के भी, भरे पेट का बहाना बना लिया. सर पे उठा के बोझा जब थक गई थी वो इक घूंट पानी पीके अपना ग़म दबा लिया. दिन सारा कि थी मेहनत पर कुछ नहीं मिला इस दर्द को ही अपना मुकद्दर बना लिया.   […]

गीतिका/ग़ज़ल

जब होके आस-पास भी खला होगा

जब होके आस-पास भी खला होगा तभी तो रोने में फिर इक मज़ा होगा.   आँखें तेरी देखेंगी जब तड़पता मुझे मैं सोचता हूँ वो कैसा सिलसिला होगा.   हो सामने हर वक़्त ऐसी बात नहीं वो अक्स उसका मुझसे है बंधा होगा.   चलता तो हूँ पर न पता है राह मुझे सही राह […]

गीतिका/ग़ज़ल

अपनी ही अंजुमन में…

अपनी ही अंजुमन में मैं अंजाना सा लगूं बिता हुआ इस दुनिया में फ़साना सा लगूं.   गाया है मुझको सबने, सबने भुला दिया ऐसा ही इक गुजरा हुआ तराना सा लगूं.   अपने ही हमनशीनों ने भुला दिया मुझे तो कैसे अब मैं गैरों को खजाना सा लगूं.   कई बार डूबा हूँ वहां […]