कविता

छोडो कल की बातें

छोडो कल की बात
आज करे कुछ नया विचार
क्या क्या करना है आगे
सोच लेते है आज
बेकार की बाते मे
समय क्यो गवाना
बित जायेगे यदि ये समय
कल फिर नही है इनको आना
जिसने अपने जीवन मे
समय को नही पहचाना
उसका जीवन नर्क बना
यहॉ जीवन भर पछताते
जिसने भी समय का
सदुपयोग किया
उसका जीवन बहुमूल्य बना
कोई नही लगा सकता इसका किमत
क्योकि ये है सबसे अनमोल रत्न
बस इतना सिखना
समय के साथ कभी
खिलवाड नही करना है
यदि तुम इसके साथ खेले
तो ये भी अपना खेल खेलाता है
अन्त मे जब तुम होश मे आओगे
तो अपने सारे सपने बिखरे देखोगें|
   निवेदिता चतुर्वेदी

निवेदिता चतुर्वेदी
बी.एसी. शौक ---- लेखन पता --चेनारी ,सासाराम ,रोहतास ,बिहार , ८२११०४