सब एक स्वर में गाओ
भारत के राष्ट्रप्रेमी अब एकता दिखाओ
ये देश है हमारा सब एक स्वर में गाओ
दुःख सुख ही जिन्दगी है ये बात याद रखना
विष झूठ का न पीना, सच की सुधा ही चखना
सुन्दर वसुन्धरा पर, तुम स्वर्ग खींच लाओ
ईसाई सिख कटासुर हिन्दू सभी हैं अपने
करने तुम्हें हैं पूरे इन भाइयों के सपने
नफरत भुलाके सबको बढकर गले लगाओ
आदर्श में नहाया हो ‘शान्त’ भाईचारा
बहती हो हर हृदय में गंगो जमुन की धारा
गीता कुरान बाइबिल गुरग्रंथ अब उठाओ
— देवकी नन्दन शान्त
