कुण्डली/छंद

प्रभु साया

साया प्यार दुलार का, मात पिता का छत्र।

शीतल छाया स्नेह की, खिलता सौरभ इत्र।।

खिलता सौरभ इत्र, महकती जीवन बगिया।

ठंडी-ठंडी ठाँव, गीत गाये मन रसिया।।

हरा-भरा है गाँव, नेह से मन हर्षाया।

दर्शन चारों धाम, जन्मदाता प्रभु साया।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८