सरस्वती वंदना
विद्या का वरदान, बुद्धि दो जग कल्याणी।।
कोकिल सा दो कंठ, मधुर हो सुस्वर वाणी।।
सदाचार हो बोध, जिंदगी हो उपकारी।
सार्थक मानव जन्म, शारदे तारण हारी।।
विद्या का वरदान, बुद्धि दो जग कल्याणी।।
कोकिल सा दो कंठ, मधुर हो सुस्वर वाणी।।
सदाचार हो बोध, जिंदगी हो उपकारी।
सार्थक मानव जन्म, शारदे तारण हारी।।