सावन
सावन में जब तुम आओ पिया
खुशियों की गठरी ले आना
न हों गर उनमें गहने ,चुनर महँगी
थोड़ा सा वक़्त तुम ले आना
साथ तुम्हारे मैं गीत गाऊँगी
परछाई तुम्हारी बन जाऊँगी
नहीं चाहिए दुनिया की सजावट
हरी चूड़ियाँ मनभावन ले आना
देखो न कितना सुंदर नजारा है
आँखों को लागे बड़ा ही प्यारा है
नहीं चाहिए सपनों का महल मुझे
पर एक झूला प्यारा ले आना
तुम जब साथ हो कैसा पतझड़
हर पल लगता जैसे सावन है
सुन लेना साजन छोटी सी विनती
हरियाली मेरे मन की लेते आना
— वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़
