गीत/नवगीत

गीत – आया राखी का त्यौहार

चाहत खुशियां बंधन प्यार।
आया राखी का त्यौहार।
सावन की पूर्णिमा उन्मेष।
आशीर्वाद देते है गणेश।
भाई बहना का इकरार।
आया राखी का त्यौहार।
बहना का तिलक स्नेह मिले।
सच्चे संकल्पों के फूल मिले।
मंगलकारी शुभ सत्कार।
आया राखी का त्यौहार।
यह दिन दृष्टि परिवर्तन का।
रिश्तों में पूजा अर्चना का।
आत्म दृष्टि में परिवार।
आया राखी का त्यौहार।
खिलते चारो और तबरूसुम।
अरूणोदय में एक तरन्नुम।
प्रतिष्ठित शानोदय गुलजार।
आया राखी का त्यौहार।
मात-पिता का अंर्तनाद मिले।
शुभ मंगल आशीर्वाद मिले।
जैसे देवालय के दीदार।
आया राखी का त्यौहार।
फसलों में दिव्य श्रृंगार।
मौसम का टूटा हंकार।
संदली मंजर है तैयार।
आया राखी का त्यौहार।
सर्दऋतु का है अभिवादन।
संपूर्ण होता है सावन।
उमरा नहीं करती तकरार।
आया राखी का त्यौहार
अतुल्य मौसम का अभिनंदन।
अंगार पुष्म चम्पा चंदन।
अर्जित अर्पित है कचनार।
आया राखी का त्यौहार।
सब धर्मों की इस मे श्रद्धा।
शुश्रषा होती है वर्षा।
भारत मां के यह संस्कार।
आया राखी का त्यौहार।
इस त्यौहार में आत्मतुष्टि।
सौंदर्य के प्रभ्रत्व में दृष्टि।
कृषिक के भरते भण्डार।
आया राखी का त्यौहार।
देवालयों में दीप शिखा है।
चारों और रूपवान दिशा है।
उमड़ रहा स्नेह का श्रृंगार।
आया राखी का त्यौहार।
बालम खुलते मंगल द्वार।
यह दिन सब को देता प्यार।
रिश्तों का माधुर्य सभ्याचार।
आया राखी का त्यौहार।

— बलविन्दर बालम

बलविन्दर ‘बालम’

ओंकार नगर, गुरदासपुर (पंजाब) मो. 98156 25409