लघुकथा

कन्यादान 

“अंकल जी,आपको मेरी शादी में आना है, यह रहा आमंत्रण पत्र” तीस वर्षीया पूनम ने कार्ड देते हुए कहा।

आमंत्रण पत्र को पढ़ते हुए सुरेश बाबू बोले, “ओह, लोगों ने कितना गलत समझ रखा था तुम्हें।

“मैंने कभी लोगों की बातों की परवाह नहीं की और आज अपने गाँव से दूर शहर में बड़ी कंपनी में जूनियर मैनेजर के पद पर हूँ।

 “तुम्हारी सोच और जज्बा को नमन करता हूंँ। काश ग्राम के प्रधान की हैसियत से लोगों की गंदी जुबान पर लगाम लगाया होता” सुरेश बाबू ने कहा।

“अंकल जी..आज पिताजी की कमी महसूस होती है,कौन करेगा कन्यादान?”

“यह मौका मुझे दो बेटी पूनम” सुरेश बाबू ने कहा।

— निर्मल कुमार दे 

*निर्मल कुमार डे

जमशेदपुर झारखंड nirmalkumardey07@gmail.com