गीत/नवगीत

अंदाज मेरी मोहब्बत का

अंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला है
कभी उष्ण एहसास है कभी शीतल जल धारा है।

सपनों की महफिल में आता दिलदार बनकर,
संगीत के सुरों में आता सितार बनकर,
सावन की रिमझिम, भादों में कृष्ण काला है,
अंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला है।

इंद्रधनुष के रंगों में दिखता है अक्स उसका,
उषा की लालिमा में रमता है अक्स उसका,
मां अम्बे की भक्ति है, त्रिपुरारी का शिवाला है,
अंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला है।

शब्दों की दुनिया में मोहब्बत का नहीं कोई सानी,
कब रूठती है, कब मनती है, अब तक है अनजानी,
उसके हुस्नो-शबाब का हर कोई मतवाला है,
अंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला है।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244