अंदाज मेरी मोहब्बत का
अंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला है
कभी उष्ण एहसास है कभी शीतल जल धारा है।
सपनों की महफिल में आता दिलदार बनकर,
संगीत के सुरों में आता सितार बनकर,
सावन की रिमझिम, भादों में कृष्ण काला है,
अंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला है।
इंद्रधनुष के रंगों में दिखता है अक्स उसका,
उषा की लालिमा में रमता है अक्स उसका,
मां अम्बे की भक्ति है, त्रिपुरारी का शिवाला है,
अंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला है।
शब्दों की दुनिया में मोहब्बत का नहीं कोई सानी,
कब रूठती है, कब मनती है, अब तक है अनजानी,
उसके हुस्नो-शबाब का हर कोई मतवाला है,
अंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला है।
— लीला तिवानी
