गीत/नवगीत

अभी सावन बरसता है, हर पत्ता हरा तेरा

खिज़ा में सदा अपनी, लगा के देख लेना तुम
हिज्र में कभी मुझको, बुला के देख लेना तुम

अभी सावन बरसता है, हर पत्ता हरा तेरा
बहारों से यहाँ अभी, है दामन भरा तेरा
वक्त हो या शख्स, फितरत बदलना है –
पतझड़ में कभी, आजमा के देख लेना तुम

राहों पे अब यहाँ, रहनुमा नही मिलते
सैय्याद मिलते हैं, सूरमा नही मिलते
साहिल पे सहारे बहुत, मिल ही जाते हैं –
मझधार में कभी, बुला के देख लेना तुम

अभी पूनम की रातें हैं, दिन भी सुनहरे हैं
चमकने वालो के बड़े, यहाँ ‘राज’ गहरे हैं
जेठ की दोपहर अभी, तपना यहाँ बाकी –
शैलाब में भी हाथ, उठा के देख लेना तुम

  • राज कुमार तिवारी “राज”

राज कुमार तिवारी 'राज'

हिंदी से स्नातक एवं शिक्षा शास्त्र से परास्नातक , कविता एवं लेख लिखने का शौख, लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र से लेकर कई पत्रिकाओं में स्थान प्राप्त कर तथा दूरदर्शन केंद्र लखनऊ से प्रकाशित पुस्तक दृष्टि सृष्टि में स्थान प्राप्त किया और अमर उजाला काव्य में भी सैकड़ों रचनाये पब्लिश की गयीं वर्तामन समय में जय विजय मासिक पत्रिका में सक्रियता के साथ साथ पंचायतीराज विभाग में कंप्यूटर आपरेटर के पदीय दायित्वों का निर्वहन किया जा रहा है निवास जनपद बाराबंकी उत्तर प्रदेश पिन २२५४१३ संपर्क सूत्र - 9984172782