किससे दोस्ती करनी है
किताबों से करोगे दोस्ती
पाखंड पास नहीं आएगा,
कौन मित्र और कौन है शत्रु
खुलकर ये बतलायेगा,
सुनी सुनाई बातों में पड़कर
अपना भविष्य जलाओगे,
घिसी पिटी राहों में चलकर
आविष्कार कहां से लाओगे,
किसने तुझको लुटा पीटा
माथे पर था किसका राज,
नए तरीके लेकर हैं बैठे
करने अपना वही काज,
अंधविश्वास और पाखंडों में
क्यों तह तक धंसते जाना,
चक्कर में पीछे मत होना
निकल चुका आगे को जमाना,
बतलायेंगे तुम्हें आस्थाई रोड़े
चाहेंगे राहों से हटाना,
तर्क वितर्क में हो जाओ प्रवीण
कि पड़ जाए उन्हें खिसियाना,
किताबों से होगा विश्व भ्रमण,
और हो पाओगे नैतिकता से समृद्ध,
खोखले दावे,मस्तिष्क खोखला
नहीं होता इससे कोई प्रसिद्ध।
— राजेन्द्र लाहिरी
