याद
हज़ारों लोगों से मिलते हैं,
हज़ारों लोग बिछड़ जाते हैं।
एक शहर के किनारे,
मैं मुस्कुराया था –
एक ऐसी याद पर,
जो फिर कभी लौट कर नहीं आई।
— अमन्दा सरत्चन्द्र
हज़ारों लोगों से मिलते हैं,
हज़ारों लोग बिछड़ जाते हैं।
एक शहर के किनारे,
मैं मुस्कुराया था –
एक ऐसी याद पर,
जो फिर कभी लौट कर नहीं आई।
— अमन्दा सरत्चन्द्र